बंगाल की खाड़ी में डूबी दो नावें: रोहिंग्या समुदाय के लोग थे सवार, 500 से ज्यादा लोगों के मरने की आशंका

बंगाल की खाड़ी में रोहिंग्या शरणार्थियों को ले जा रही दो नावें डूबने से 500 से अधिक लोगों की मौत की आशंका जताई गई है। संयुक्त राष्ट्र की दो प्रमुख एजेंसियों—अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR)—ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस गंभीर त्रासदी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, दोनों नावें जून 2026 के आखिरी हफ्ते में म्यांमार के पश्चिमी रखाइन राज्य से रवाना हुई थीं। इन नावों पर सवार अधिकांश लोग म्यांमार के पीड़ित रोहिंग्या समुदाय के थे। इनमें से कुछ लोग ऐसे भी थे जो बांग्लादेश की सीमा पर बने शरणार्थी शिविरों से आए थे।
माना जा रहा है कि पहली नाव में लगभग 250 लोग सवार थे, जो म्यांमार तट से रवाना होने के कुछ ही देर बाद लापता हो गई और उससे संपर्क टूट गया। 280 लोगों को ले जा रही दूसरी नाव 8 जुलाई 2026 को म्यांमार के अयेयारवाडी तट के पास खराब मौसम के कारण समुद्र में डूब गई।
म्यांमार सरकार ने प्रतिक्रिया देने से किया इनकार
म्यांमार के गृह मंत्रालय के प्रवक्ता, कार्यवाहक पुलिस ब्रिगेडियर जनरल सो लिन आंग ने इस पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया हैं। म्यांमार के राष्ट्रपति और अयेयारवाडी क्षेत्र की सरकार के प्रवक्ताओं ने भी कोई बयान नहीं दिया है।
बारिश और बाढ़ में जोखिम भरी हो सकती है यात्रा
रोहिंग्या, जो हाल के सालों में म्यांमार और बांग्लादेश के खराब हालात वाले रिफ्यूजी कैंपों से हजारों की संख्या में भागकर आए हैं, आमतौर पर मॉनसून के दौरान नाव से ऐसी यात्रा करने से बचते हैं. UNHCR और IOM ने अपने बयान में इस बात का ज्रिक किया है कि हाल ही में पूरे इलाके में हुई भारी बारिश और बाढ़ की वजह से ऐसी यात्राएं और भी ज्यादा जोखिम भरी हो गई होंगी.
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