विश्व पर्यावरण दिवस'प्रकृति का श्रृंगार हैं पौधे': हरियाली से आएगी खुशहाली, प्राकृतिक आभूषण को सहेजना आज के समय की सबसे बड़ी मांग

निवेदिता चंद|05 जून 2026
हरियाली से आएगी खुशहाली, प्राकृतिक आभूषण को सहेजना आज के समय की सबसे बड़ी मांग

विश्वभर में प्रत्येक वर्ष पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि पृथ्वी और मानव जीवन के अस्तित्व से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चिंतन और संकल्प का अवसर है। धरती को नया जीवन देने वाले पौधे ही वास्तव में 'प्रकृति का असली श्रृंगार' हैं। ये न केवल अपनी हरियाली से धरा का रूप सजाते हैं, बल्कि बिगड़ते पर्यावरण और मौसम चक्र को संतुलित रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। आज के समय में जब प्रदूषण का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, तब मानव जीवन को शुद्ध ऑक्सीजन का सुरक्षा कवच प्रदान करने का एकमात्र जरिया यही पेड़-पौधे हैं। निस्वार्थ भाव से फल, फूल, औषधियां और घनी छांव देकर ये पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखते हैं। इस प्राकृतिक आभूषण को सहेजना और अधिक से अधिक वृक्षारोपण करना आज समय की सबसे बड़ी मांग बन चुका है।

तेजी से बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की अंधाधुंध कटाई, जैव विविधता के क्षरण और प्लास्टिक कचरे जैसी गंभीर चुनौतियों के बीच विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना तथा प्रकृति के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 1972 में आयोजित मानव पर्यावरण सम्मेलन के बाद पर्यावरण संरक्षण को वैश्विक एजेंडे में शामिल किया गया। इसके बाद पांच जून 1973 को पहला विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। तब से लेकर आज तक यह दिवस दुनिया के सबसे बड़े पर्यावरणीय जनजागरूकता अभियानों में शामिल हो चुका है। वर्तमान में 150 से अधिक देशों में विभिन्न कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों, पौधरोपण, स्वच्छता अभियान और पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियों के माध्यम से इसे मनाया जाता है।

हरियाली से आएगी खुशहाली, प्राकृतिक आभूषण को सहेजना आज के समय की सबसे बड़ी मांग

पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी की अहम भूमिका

एक्सपर्ट्स का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या इंटरनेशनल संगठनों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। प्लास्टिक का कम उपयोग, जल संरक्षण, ऊर्जा की बचत, जैविक संसाधनों का उपयोग तथा अधिक से अधिक पौधरोपण जैसे छोटे-छोटे प्रयास भी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा योगदान दे सकते हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण के अनुकूल आदतों को अपनाए, तो प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

हरियाली से आएगी खुशहाली, प्राकृतिक आभूषण को सहेजना आज के समय की सबसे बड़ी मांग
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जलवायु परिवर्तन बना सबसे बड़ी चुनौती

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में मौसम के पैटर्न में तेजी से बदलाव देखने को मिला है। कहीं अत्यधिक गर्मी, कहीं बाढ़, कहीं सूखा और कहीं जंगलों में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वैज्ञानिक इसे जलवायु परिवर्तन का परिणाम मानते हैं। बढ़ता वैश्विक तापमान न केवल मानव जीवन बल्कि कृषि, जल संसाधनों और जैव विविधता पर भी गंभीर प्रभाव डाल रहा है। ऐसे में विश्व पर्यावरण दिवस हमें चेतावनी देता है कि यदि अभी से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ सकता है।

हरियाली से आएगी खुशहाली, प्राकृतिक आभूषण को सहेजना आज के समय की सबसे बड़ी मांग
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प्रकृति संरक्षण ही भविष्य की सुरक्षा

विश्व पर्यावरण दिवस का मूल संदेश यही है कि प्रकृति और विकास के बीच संतुलन बनाए बिना सतत विकास संभव नहीं है। पर्यावरण संरक्षण केवल आज की जरूरत नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा का आधार है। हरियाली, स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और स्वस्थ पर्यावरण ही मानव जीवन की वास्तविक पूंजी हैं। इसलिए विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए पृथ्वी को सुरक्षित और बेहतर बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

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अपडेट्स

05 जून 2026

व्यक्तिगत प्रयास से ही आएगा पर्यावरण में बड़ा बदलाव

डॉ. आर. एन. यादव ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने परिवार के किसी बुजुर्ग के नाम पर कम से कम एक पेड़ लगाना चाहिए। पेड़ लगाकर उसकी देखभाल करने से पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भी है। व्यक्तिगत प्रयास जब सामूहिक अभियान बनते हैं, तभी बड़े स्तर पर सकारात्मक बदलाव संभव होता है।

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ऑक्सीजन और छांव के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाए

कुसुम ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने की जरूरत है। जिससे ऑक्सीजन की कमी न हो और लोगों को छांव मिल सके। उन्होंने कहा कि सड़कों के निर्माण के दौरान बड़ी संख्या में पेड़ कट रहे हैं। जो चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने घर के परिसर और गमलों में नीम, केला, अमरूद और आम के पौधे लगाए हैं। जिनकी देखभाल में बच्चे भी उनकी मदद करते हैं।

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अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और उनकी देखभाल करें

कक्षा 11वीं के छात्र प्रशांत शुक्ला का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाने चाहिए। उनकी उचित देखभाल करने में भी अपना अधिकतम सहयोग देना चाहिए।

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