रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका की सख्त: भारत समेत 5 देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव, रूस के ऊर्जा कारोबार पर बढ़ेगा दबाव

वॉशिंगटन|56 मिनट पहले
भारत समेत 5 देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव, रूस के ऊर्जा कारोबार पर बढ़ेगा दबाव

अमेरिका ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट में पेश संशोधित प्रतिबंध विधेयक में भारत, चीन, हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान जैसे देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस पहल का उद्देश्य रूस के ऊर्जा कारोबार से होने वाली आय को सीमित करना और उसकी युद्ध क्षमता को कमजोर करना बताया गया है। हालांकि यह प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है और इसके लिए अमेरिकी संसद के दोनों सदनों की मंजूरी के साथ राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक होगी।

अमेरिकी सीनेट में पेश संशोधित विधेयक में उन देशों को निशाने पर रखा गया है, जो रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल और गैस खरीद रहे हैं। प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे देशों के अमेरिका के साथ होने वाले व्यापार पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। पहले तैयार मसौदे में 500 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान था। लेकिन बाद में इसे घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया। विधेयक में रूस के अधिकारियों, केंद्रीय बैंक, सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं और तथाकथित 'शैडो टैंकर फ्लीट' पर भी अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव शामिल है।

सूची में भारत समेत पांच देश प्रस्तावित

प्रस्तावित सूची में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को शामिल किया गया है। यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर केवल इसलिए टैरिफ लगाएगा कि वह रूस से तेल खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था को आर्थिक समर्थन दे रहा है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि इससे रूस की ऊर्जा आय प्रभावित होगी और उसकी सैन्य क्षमता पर भी असर पड़ेगा।

भारत का रूस से तेल आयात लगातार बढ़ा

जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार भारत ने रूस से प्रतिदिन 26.1 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात किया, जो देश के कुल तेल आयात का 52.4 प्रतिशत है। यानी भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से अधिक बैरल रूस से आया। मई की तुलना में जून में रूस से तेल आयात में करीब 39 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी वजह से भारत इस प्रस्तावित अमेरिकी कार्रवाई के दायरे में प्रमुख देशों में शामिल है।

कुछ यूरोपीय देशों को मिलेगी राहत

संशोधित विधेयक में रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले कुछ देशों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि जिन यूरोपीय देशों का रूस की कुल गैस खरीद में हिस्सा 15 प्रतिशत से कम है और जो अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में काम कर रहे हैं, उन्हें प्रस्तावित टैरिफ से छूट देने का प्रावधान रखा गया है। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि यह कदम यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं, बल्कि रूस के ऊर्जा कारोबार को आर्थिक सहारा देने वाले देशों पर केंद्रित है।

कानून बनने की प्रक्रिया बाकी

रूस पर सख्ती से जुड़े इस विधेयक को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों का समर्थन प्राप्त है, जिससे इसके आगे बढ़ने की संभावना मजबूत मानी जा रही है। हालांकि इसे कानून बनने से पहले सीनेट और प्रतिनिधि सभा दोनों से पारित होना होगा। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर आवश्यक होंगे। संशोधित प्रस्ताव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को यह अधिकार भी दिया गया है कि राष्ट्रीय हितों को देखते हुए वे किसी देश को टैरिफ या प्रतिबंधों में छूट दे सकें। यह विधेयक अप्रैल 2025 में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पेश किया था। अब तक 26 सीनेटर इसके समर्थन में आ चुके हैं और आगे भी समर्थन बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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