अमेरिकी दबाव बेअसर: रूस से जारी रहेगा तेल खरीद, फंसे जहाजों को 30 दिनों की मिली बड़ी छूट

19 मई 2026
रूस से जारी रहेगा तेल खरीद, फंसे जहाजों को 30 दिनों की मिली बड़ी छूट

भारत ने साफ संकेत दिया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और वैश्विक दबाव के बावजूद वह रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि अमेरिकी छूट समाप्त होने के बाद भी भारत की आयात नीति में कोई बदलाव नहीं होगा और देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के अनुसार तेल खरीदता रहेगा। सरकार का कहना है कि भारत ने पहले से ही पर्याप्त कच्चे तेल की व्यवस्था कर रखी है, इसलिए सप्लाई को लेकर किसी तरह की चिंता नहीं है।

इस बीच वैश्विक तेल बाजार में संभावित संकट को देखते हुए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने समुद्र में फंसे रूसी तेल के जहाजों से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों का अस्थायी लाइसेंस जारी किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक तेल बाजार को स्थिर बनाए रखने और ऊर्जा संकट झेल रहे देशों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इससे ऊर्जा आपूर्ति व्यवस्था में अतिरिक्त लचीलापन मिलेगा और बाजार में अनावश्यक उथल-पुथल को रोका जा सकेगा।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा रूसी तेल आयात

सरकारी आंकड़ों और इंटरनेशनल डेटा एजेंसियों के मुताबिक, मई महीने में भारत ने रूस से रिकॉर्ड स्तर पर कच्चे तेल का आयात किया है। आंकड़ों के अनुसार, मई में भारत का रूसी तेल आयात लगभग 23 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि पूरे महीने का औसत आयात भी करीब 19 लाख बैरल प्रतिदिन के आसपास रह सकता है। भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने अमेरिकी छूट समाप्त होने से पहले ही तेल खरीद की रफ्तार तेज कर दी थी।

भारत ने स्पष्ट किया अपना रुख

संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत का रुख इस मुद्दे पर शुरू से स्पष्ट रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने अमेरिकी छूट मिलने से पहले भी रूस से तेल खरीदा था, छूट के दौरान भी खरीद जारी रखी और आगे भी यह प्रक्रिया जारी रहेगी। उनका कहना है कि देश की पहली प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू जरूरतों को पूरा करना है। सरकार का मानना है कि यदि तेल की आपूर्ति बाधित होती है तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा।

महंगाई और सप्लाई संकट को लेकर चिंता

रिपोर्ट के अनुसार भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी प्रशासन को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच तेल सप्लाई बनाए रखना भारत के लिए बेहद जरूरी है। अधिकारियों ने चेतावनी दी थी कि अगर कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई तो घरेलू बाजार में महंगाई बढ़ सकती है और एलपीजी जैसी जरूरी सेवाओं पर दबाव बढ़ेगा। इसी वजह से भारत ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदने की रणनीति जारी रखे हुए है।

युद्ध के बाद बढ़ी रूस पर निर्भरता

रूस-यूक्रेन वार शुरू होने के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कई आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। इसके बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए रूस से तेल आयात जारी रखा। पिछले वर्ष अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते कुछ समय के लिए आयात में गिरावट जरूर आई थी, लेकिन बाद में इसमें फिर तेजी देखने को मिली। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सस्ते दामों पर उपलब्ध रूसी तेल भारतीय अर्थव्यवस्था और घरेलू ईंधन कीमतों को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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