बीजिंग में जिनपिंग-पुतिन की मुलाकात: चीनी राष्ट्रपति बोले- दुनिया फिर ‘जंगलराज’ की ओर बढ़ रही: मिडिल ईस्ट युद्ध पर जताई चिंता

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच चीन और रूस ने दुनिया को बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने बुधवार को बीजिंग में उच्चस्तरीय बैठक कर मौजूदा वैश्विक हालात पर गंभीर चिंता जताई। बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया एक बार फिर “जंगलराज” की तरफ बढ़ रही है, जहां अंतरराष्ट्रीय नियम और संतुलन कमजोर पड़ते जा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युद्ध और सैन्य संघर्षों को समय रहते नहीं रोका गया, तो वैश्विक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में दोनों नेताओं की मुलाकात बेहद औपचारिक और रणनीतिक माहौल में हुई। रेड कार्पेट स्वागत के बीच सैन्य बैंड ने रूस और चीन के राष्ट्रगान बजाए। इसके बाद दोनों नेताओं ने वैश्विक राजनीति, ऊर्जा सुरक्षा, मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष, यूक्रेन संकट और ब्रिक्स देशों के सहयोग जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक के दौरान दोनों देशों ने यह संकेत भी दिया कि पश्चिमी देशों के बढ़ते दबाव के बीच रूस और चीन अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
‘एकतरफा सैन्य कार्रवाई से बिगड़ रहा वैश्विक संतुलन’
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बैठक में कहा कि लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाइयों और युद्ध की राजनीति से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि अगर ताकतवर देश अपनी शक्ति के दम पर फैसले लेने लगेंगे, तो दुनिया एक अस्थिर दौर में पहुंच जाएगी। जिनपिंग ने साफ शब्दों में कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को रोकना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने भी इस दौरान वैश्विक राजनीति में “दबदबे की मानसिकता” खत्म करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि रूस और चीन मिलकर एक ज्यादा संतुलित और न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। पुतिन ने दावा किया कि पिछले 25 वर्षों में दोनों देशों के संबंध अभूतपूर्व स्तर तक मजबूत हुए हैं और अब दोनों देश कई रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ा रहे हैं।
ऊर्जा, व्यापार और ब्रिक्स सहयोग पर जोर
बैठक के दौरान रूस और चीन के बीच ऊर्जा और व्यापार सहयोग को लेकर भी कई अहम चर्चाएं हुईं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन इस दौरे में बड़े कारोबारी और सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ पहुंचे हैं। दोनों देशों के बीच करीब 40 समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिनमें ऊर्जा, पर्यटन, शिक्षा और आर्थिक सहयोग से जुड़े करार शामिल हैं। यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप में रूसी गैस की मांग घटने के कारण रूस अब चीन के साथ ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने में जुटा है। बैठक से पहले जारी वीडियो संदेश में पुतिन ने कहा कि रूस और चीन संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता जैसे “मुख्य हितों” की रक्षा के लिए मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसा, आपसी सम्मान और बराबरी पर आधारित साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।
सभी देशों को मिले समान अवसर
वहीं शी जिनपिंग ने कहा कि दुनिया को अब ऐसी वैश्विक व्यवस्था की जरूरत है, जहां सभी देशों को समान अवसर और सम्मान मिले। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजिंग में हुई यह मुलाकात केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका और पश्चिमी देशों को भी एक बड़ा कूटनीतिक संदेश है। मिडिल ईस्ट और यूक्रेन जैसे मुद्दों के बीच चीन और रूस की बढ़ती नजदीकियां आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
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