अमेरिकी संसद में ट्रम्प को झटका: ईरान युद्ध पर नियंत्रण वाला प्रस्ताव पास, रिपब्लिकन सांसदों ने भी किया विरोध

9 घंटे पहले
ईरान युद्ध पर नियंत्रण वाला प्रस्ताव पास, रिपब्लिकन सांसदों ने भी किया विरोध

अमेरिका की राजनीति में ईरान को लेकर चल रहा तनाव अब खुलकर सत्ता और संसद के बीच टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सैन्य शक्तियों को सीमित करने वाला महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित हो गया है। इस प्रस्ताव के समर्थन में विपक्षी डेमोक्रेट सांसदों के साथ चार रिपब्लिकन सांसदों ने भी वोट दिया, जिसे ट्रम्प प्रशासन के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। 50-47 मतों से पारित इस प्रस्ताव का मकसद राष्ट्रपति को बिना संसदीय मंजूरी के लंबे समय तक सैन्य कार्रवाई करने से रोकना है। हालांकि यह प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है और इसे आगे कई संवैधानिक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।

अमेरिकी संसद में हुई इस वोटिंग ने साफ संकेत दिया है कि ईरान के मुद्दे पर ट्रम्प सरकार को अब अपने ही दल के भीतर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। प्रस्ताव के मुताबिक यदि अमेरिका ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य अभियान को जारी रखना चाहता है, तो उसे कांग्रेस से औपचारिक मंजूरी लेनी होगी। अभी इस पर सीनेट में अंतिम मतदान बाकी है, जिसके बाद इसे रिपब्लिकन बहुल हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भेजा जाएगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वहां इस प्रस्ताव को कड़ी चुनौती मिल सकती है। इसके अलावा राष्ट्रपति ट्रम्प के पास वीटो का अधिकार भी मौजूद है, जिससे वह इस प्रस्ताव को रोक सकते हैं। हालांकि वीटो निरस्त करने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जो फिलहाल विपक्ष के लिए आसान नहीं माना जा रहा।

संसद बनाम राष्ट्रपति की शक्तियों पर बढ़ी बहस

ईरान को लेकर अमेरिकी राजनीति में यह बहस तेज हो गई है कि युद्ध शुरू करने का अधिकार आखिर किसके पास होना चाहिए। विपक्षी दल डेमोक्रेट्स का कहना है कि अमेरिकी संविधान के अनुसार युद्ध संबंधी अंतिम अधिकार संसद के पास है, न कि केवल राष्ट्रपति के पास। इसी मुद्दे को लेकर वर्जीनिया के डेमोक्रेट सीनेटर टिम केन यह प्रस्ताव लेकर आए। बहस के दौरान उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में राष्ट्रपति को संसद के सामने अपनी स्पष्ट रणनीति रखनी चाहिए। टिम केन ने कहा कि अमेरिका किसी बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रहा है और ऐसे फैसले केवल कार्यपालिका के भरोसे नहीं छोड़े जा सकते। वहीं व्हाइट हाउस ने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए अपने संवैधानिक अधिकारों के तहत कार्रवाई की है। प्रशासन का तर्क है कि संकट की स्थिति में राष्ट्रपति को त्वरित सैन्य निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। अमेरिकी कानून के अनुसार राष्ट्रपति बिना संसदीय अनुमति के अधिकतम 60 दिनों तक सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं, जिसके बाद कांग्रेस की मंजूरी लेना अनिवार्य हो जाता है।

दुनिया की नजर अमेरिका पर

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। पिछले 24 घंटों में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका ईरान पर बड़ा हमला करने की तैयारी में था, लेकिन कतर, सऊदी अरब और यूएई की अपील के बाद फिलहाल उसे रोक दिया गया। दूसरी ओर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों के लिए नई अनुमति प्रणाली लागू कर दी है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

किसी दबाव में समझौता नहीं करेगा ईरान

ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर किसी दबाव में समझौता नहीं करेगा। इसी बीच ईरानी संसद में ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ भड़काऊ प्रस्तावों की चर्चा ने तनाव को और बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार और पश्चिम एशिया की स्थिरता पर सीधा पड़ सकता है।

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