परमाणु समझौते पर अमेरिका सख्त: ईरान से मांगा 400 किलो एनरिच्ड यूरेनियम, सिर्फ एक न्यूक्लियर सेंटर चलाने की अनुमति

18 मई 2026
ईरान से मांगा 400 किलो एनरिच्ड यूरेनियम, सिर्फ एक न्यूक्लियर सेंटर चलाने की अनुमति

पश्चिम एशिया में एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव तेज होता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी टकराव अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए ईरान के सामने पांच अहम शर्तें रखी हैं। हालांकि, इन शर्तों की अब तक किसी भी पक्ष ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन रिपोर्ट सामने आने के बाद क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका की कथित शर्तों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण, एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंपने और सीमित परमाणु गतिविधियों की अनुमति जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, वॉशिंगटन चाहता है कि ईरान अपने पास मौजूद लगभग 400 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंप दे। इसके अलावा, ईरान में केवल एक परमाणु केंद्र को संचालित रखने की अनुमति दी जाए। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह ईरान की फ्रीज की गई विदेशी संपत्तियों में से 25 प्रतिशत से अधिक राशि जारी करने के पक्ष में नहीं है। अमेरिकी पक्ष की एक अन्य शर्त यह भी बताई जा रही है कि लेबनान सहित क्षेत्रीय संघर्षों को सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत के जरिए समाप्त किया जाए। इन प्रस्तावों को लेकर ईरान में तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है और इसे उसकी संप्रभुता पर दबाव की रणनीति माना जा रहा है।

होर्मुज पर बढ़ा तनाव

इसी बीच ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी हटाने की मांग की है। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यदि दबाव जारी रहा तो ओमान सागर अमेरिकी सेना के लिए “कब्रगाह” साबित हो सकता है। इस बयान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से होती है। भारत सहित कई एशियाई देशों की नजरें अब इस क्षेत्र की स्थिति पर टिकी हुई हैं। इस तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात के बराकाह परमाणु ऊर्जा संयंत्र के बाहर ड्रोन हमले की घटना ने हालात को और गंभीर बना दिया है। शुरुआती जांच में ईरान समर्थित तत्वों पर संदेह जताया जा रहा है। वहीं, भारत ने भी संयुक्त राष्ट्र में साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में कॉमर्शियल शिपिंग को बाधित करना अस्वीकार्य है। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखना वैश्विक जिम्मेदारी है।

इजराइल और अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियां

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों से हथियार और गोला-बारूद लेकर कई कार्गो विमान तेल अवीव पहुंचे हैं। इसे ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि उसने जल्द समझौता नहीं किया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। उधर, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई भी एक बार फिर टल गई है। बचाव पक्ष ने “गोपनीय सुरक्षा और राजनीतिक कारणों” का हवाला देते हुए अदालत से समय मांगा। इन घटनाओं ने यह संकेत दे दिया है कि पश्चिम एशिया में कूटनीतिक तनाव, सैन्य गतिविधियां और राजनीतिक अस्थिरता आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है।

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