ईरान पर ट्रम्प का बड़ा बयान: 'डील हुई तो सुप्रीम लीडर से मिलने पर होगा गर्व', यूरेनियम के लिए सैन्य अभियान पर भी था विचार

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान संबंधों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा बयान दिया है। व्हाइट हाउस में बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच किसी व्यापक समझौते पर सहमति बनती है तो वह ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई से मुलाकात करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से ऐसी मुलाकात की पहल नहीं कर रहे हैं। लेकिन यदि कूटनीतिक परिस्थितियां अनुकूल होती हैं तो उनसे मिलना उनके लिए सम्मान की बात होगी। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि संभावित मुलाकात पूरी गरिमा और सम्मान के साथ होगी। वह ईरानी नेतृत्व के साथ सम्मानजनक व्यवहार करेंगे।
ट्रम्प ने खुलासा किया कि उनकी सरकार ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार को अपने नियंत्रण में लेने के लिए सैन्य अभियान चलाने की संभावना पर भी विचार किया था। हालांकि विस्तृत मूल्यांकन के बाद इस योजना को खारिज कर दिया गया। ट्रम्प के अनुसार यह अभियान अत्यधिक जोखिमपूर्ण था। इसमें अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता था। उन्होंने कहा कि ईरान से यूरेनियम हासिल करना किसी सीमित सैन्य कार्रवाई जैसा नहीं है, बल्कि इसके लिए जटिल रणनीतिक और तकनीकी संसाधनों की आवश्यकता होती। यही वजह रही कि प्रशासन ने सैन्य विकल्प की बजाय अन्य उपायों को प्राथमिकता दी।
कूटनीतिक गतिविधियां तेज
इस बीच मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के संकेत अभी स्पष्ट नहीं हैं। कुवैत इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कथित ड्रोन हमले, दक्षिणी लेबनान में सीजफायर के बावजूद जारी सैन्य गतिविधियों तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं ने हालात को और जटिल बना दिया है। ईरान ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उसके हितों पर किसी भी प्रकार का हमला हुआ तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। वहीं अमेरिकी संसद के निचले सदन में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से संबंधित राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करने के प्रस्ताव ने वॉशिंगटन की राजनीति में भी नई बहस छेड़ दी है।
भारत ने शांति सैनिकों पर हमले की निंदा की
दूसरी ओर, लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर हुए हमले की भारत ने कड़ी निंदा की है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी इस घटना को इंटरनेशनल मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन बताया है। क्षेत्रीय अस्थिरता के बीच वैश्विक समुदाय कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है। जबकि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित संवाद को भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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