अमेरिका-ईरान युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर: डिजिटल माध्यम से जुड़े ईरानी राष्ट्रपति, होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर बनी सहमति

कई महीनों से जारी तनाव और सैन्य टकराव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल हुई है। दोनों देशों ने अंतरिम शांति समझौते (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। समझौते के तहत युद्धविराम लागू करने, होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात बहाल करने तथा क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। समझौते के लागू होने के साथ ही इंटरनेशनल लेवल पर राहत की भावना देखी जा रही है। हालांकि इसके स्थायी परिणामों को लेकर एक्सपर्ट अभी भी सतर्क नजर आ रहे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय पैलेस में आयोजित बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौता दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी मौजूद रहे। वहीं ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने तेहरान से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के जरिए समझौते को मंजूरी दी। समझौते की घोषणा के तुरंत बाद इसे प्रभावी कर दिया गया। मूल रूप से इस समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड के लूसर्न में हस्ताक्षर होने थे। लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से पहले ही इसे अंतिम रूप दे दिया गया।
होर्मुज स्ट्रेट और लेबनान को लेकर अहम प्रावधान
समझौते में ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष समाप्त करने के अलावा लेबनान में तनाव कम करने और समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट को पुनः खोलने का प्रावधान शामिल है। इसके साथ ही अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने पर भी सहमति बनी है। इंटरनेशनल व्यापार और ऊर्जा बाजारों के लिए इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के बड़े हिस्से की तेल आपूर्ति गुजरती है।
परमाणु कार्यक्रम फिर चर्चा के केंद्र में
विश्लेषकों का मानना है कि इस समझौते के पीछे ईरान के परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी प्रमुख कारण रहा है। वर्ष 2015 के परमाणु समझौते में ईरान ने यूरेनियम संवर्धन को 3.67 प्रतिशत तक सीमित रखने पर सहमति दी थी। हालांकि 2018 में अमेरिका के समझौते से बाहर निकलने के बाद ईरान ने संवर्धन स्तर बढ़ाना शुरू कर दिया। इंटरनेशनल परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, हाल के वर्षों में ईरान 60 प्रतिशत तक एनरिच्ड यूरेनियम का उत्पादन कर रहा था। इसने वैश्विक शक्तियों की चिंता बढ़ा दी थी।
तेल बाजार में राहत, लेकिन संदेह बरकरार
समझौते की घोषणा के बाद वैश्विक तेल बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। निवेशकों को उम्मीद है कि होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल आपूर्ति सामान्य होगी और बाजार में स्थिरता आएगी। इसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी ओर, ईरान के कुछ राजनीतिक नेताओं ने समझौते को लेकर संदेह भी जताया है। ईरानी सांसद मालेक शरियती ने कहा कि केवल हस्ताक्षर हो जाने से समझौते के पालन की गारंटी नहीं मिलती। अमेरिका को अपने वादों पर अमल करना होगा।
एक्सपर्ट्स ने जताई सावधानी
मध्य-पूर्व मामलों के जानकारों का मानना है कि यह समझौता क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन स्थायी शांति स्थापित होने में अभी समय लग सकता है। उनका कहना है कि लेबनान और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में हालात पूरी तरह सामान्य होने और सभी पक्षों के बीच भरोसा कायम होने में कई महीने लग सकते हैं। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों देश समझौते की शर्तों का कितना ईमानदारी से पालन करते हैं। यह पहल क्षेत्र में स्थायी शांति का आधार बन पाती है या नहीं।
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