PoK प्रदर्शनकारियों पर रक्षा मंत्री सख्त: मार्च के दौरान हुई हिंसा, 30 लोगों की मौत

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चुनाव और शरणार्थी सीटों के विरोध को लेकर जारी आंदोलन के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का कड़ा बयान सामने आया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों को भारत की तरह पाकिस्तान का दुश्मन बताते हुए कहा कि ऐसे लोगों से किसी प्रकार की बातचीत नहीं की जाएगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रदर्शनकारियों के मार्च पर सुरक्षा बलों की फायरिंग में 30 लोगों की मौत और 50 से अधिक के घायल होने की खबर है। हालात को देखते हुए पूरे क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं।
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के बैनर तले करीब पांच हजार लोग रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च कर रहे थे। संगठन का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी कर दी। इसमें 30 लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक घायल हुए। दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार का दावा है कि प्रदर्शनकारी आधुनिक हथियारों से लैस थे और उन्होंने पहले सुरक्षाबलों पर हमला किया। इसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई।
12 शरणार्थी सीटों को लेकर आंदोलन तेज
आंदोलन का नेतृत्व कर रही JAAC की प्रमुख मांग PoK विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटों को समाप्त करने की है। संगठन का कहना है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद की राजनीतिक पार्टियां स्थानीय सरकार के गठन को प्रभावित करती हैं। PoK विधानसभा की कुल 53 सीटों में से 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो 1947 और उसके बाद जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान गए थे। इन सीटों के मतदाता पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं।
भारत ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
हिंसा के बाद पाकिस्तान ने पूरे PoK में अतिरिक्त सेना, पैरा मिलिट्री और आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी तैनात कर दी है। साथ ही धारा-144 लागू कर इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। उधर भारत ने PoK में हो रहे चुनाव को खारिज करते हुए इसे "दिखावटी कवायद" बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान इस प्रक्रिया के जरिए अपने अवैध कब्जे और मानवाधिकार उल्लंघनों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र, जिसमें PoK भी शामिल है, भारत का अभिन्न हिस्सा है।











