यूक्रेन के राष्ट्रपति ने रूस पर लगाया आरोप: भारत समेत 47 देशों के नागरिकों का हो रहा इस्तेमाल, लालच देकर युध्द के मैदान में धकेला जा रहा

भारत समेत 47 देशों के नागरिकों का हो रहा इस्तेमाल, लालच देकर युध्द के मैदान में धकेला जा रहा

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से दावा किया है कि रूस अपने सैन्य अभियान में भारत समेत 47 देशों के नागरिकों का इस्तेमाल कर रहा है। अपने दिए भाषण में जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस इन विदेशी नागरिकों को धोखे, चालाकी और वित्तीय प्रलोभन के जरिए युद्ध के मैदान में धकेल रहा है।

जेलेंस्की ने कहा कि रूस विदेशी नागरिकों को नौकरी, शिक्षा या अच्छे भविष्य के झूठे वादे देकर अपने यहां बुलाता है। बाद में उन्हें दबाव बनाकर या मजबूर करके यूक्रेन के खिलाफ अग्रिम मोर्चे पर लड़ने के लिए भेज दिया जाता है। उन्होंने अपने संबोधन में भारत के अलावा घाना, नेपाल, ताजिकिस्तान, यमन, केन्या, जिम्बाब्वे, क्यूबा, बेलारूस, सूडान और दक्षिण अफ्रीका जैसे कई देशों का विशेष रूप से नाम लिया।

जेलेंस्की ने सभी देशों के प्रतिनि​धियों से की अपील

जेलेंस्की ने इन सभी 47 देशों के प्रतिनिधियों से कहा, अपने नागरिकों की देखभाल करें और उन्हें इस युद्ध का हिस्सा बनने से रोकें। पुतिन को अपने देश के लोगों की जिंदगियों से खेलने का मौका न दें। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि यूक्रेनी ड्रोन्स के जरिए युद्ध के मैदान में गैर-रूसी नागरिकों के मारे जाने के वीडियो सामने आ रहे हैं और यूक्रेन को समय-समय पर इन देशों से अपने युद्धबंदियों को वापस भेजने के अनुरोध मिलते रहते हैं।

227 भारतीय नागरिको को रूसी सेना में किया गया था भर्ती

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि भारतीय नागरिकों की रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती का मुद्दा भारत-रूस के बीच विभिन्न स्तरों पर कई मौकों पर उठाया गया है। उन्होंने कहा था कि पिछली बार तक हमें 227 भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी थी जिन्हें रूसी सेना में भर्ती किया गया था। इनमें से 139 भारतीय नागरिकों को सेना से मुक्त किए जाने की जानकारी हमें मिली है। और दुर्भाग्य से हमारे पास अब तक 51 लोगों के मारे जाने की भी जानकारी है।

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