प्याज पर दिखें काले धब्बे: खाये या फेंके? सेहत पर पड़ सकता है असर

1 घंटा पहले
खाये या फेंके? सेहत पर पड़ सकता है असर

प्याज पर दिखने वाले काले दाग अक्सर ब्लैक मोल्ड (एस्परगिलस नाइजर) नामक फंगस होते हैं, जो नमी और गर्मी के कारण पनपते हैं। यदि दाग केवल बाहरी सूखी परतों तक ही सीमित हैं, तो उन्हें छीलकर और धोकर उपयोग करना सुरक्षित है। हालांकि, अगर प्याज अंदर से नरम, बदबूदार या अत्यधिक संक्रमित हो, तो उसे तुरंत फेंक दें।

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्याज पर दिखने वाले सभी काले धब्बे एक जैसे नहीं होते। कई बार यह केवल बाहरी सूखे छिलके पर जमा धूल या मिट्टी होती है, जिसे साफ करके हटाया जा सकता है। हालांकि कई मामलों में यह ब्लैक मोल्ड नामक फफूंदी भी हो सकती है। यह फंगस खेत में फसल के दौरान, कटाई के बाद या फिर भंडारण के समय नमी, गर्मी और खराब वेंटिलेशन की वजह से तेजी से बढ़ता है।

प्याज वाले फंगस नहीं होते संक्रामक

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्याज के छिलके पर काला दाग, मिट्टी में पाए जाने वाले एक सामान्य कवक के कारण दिखाई देता है। प्याज पर पाए जाने वाले फंगस सामान्यत: संक्रामक नहीं होते हैं, हालांकि इस्तेमाल से पहले इसे अच्छी तरह से धो लेना जरूरी है।

स्वस्थ लोगों को ब्लैक मोल्ड से खतरा नहीं

अधिकांश स्वस्थ लोगों में थोड़ी मात्रा में बाहरी ब्लैक मोल्ड के संपर्क से खतरा नहीं होता है। हालांकि यदि फफूंदी प्याज की अंदरूनी परतों तक फैल गई हो, प्याज नरम हो गया हो या सड़न दिखाई दे रही हो, तो उसे खाना सुरक्षित नहीं माना जाता। फफूंदी केवल सतह पर ही नहीं रहती, बल्कि कई बार उसकी महीन जड़ें अंदर तक फैल सकती हैं, जो आंखों से दिखाई नहीं देतीं।

कमजोर इम्यून वाले बरते सावधानी

स्वस्थ व्यक्ति में थोड़ी मात्रा में बाहरी ब्लैक मोल्ड के संपर्क से गंभीर बीमारी होना सामान्य नहीं माना जाता। हालांकि कुछ लोगों में फफूंदी के बीजाणु एलर्जी, छींक, सांस की तकलीफ या आंखों में जलन जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि केवल बाहरी सूखी परत पर थोड़ा काला पाउडर है और अंदर का प्याज पूरी तरह सख्त और साफ है, तो बाहरी परत हटाकर अच्छी तरह धोने के बाद उपयोग किया जा सकता है।

विशेषज्ञ की सलाह

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, प्याज में काले धब्बे पैदा करने वाला फंगस आमतौर पर नुकसानदायक नहीं होता। हालांकि कुछ स्थितियों में ये ओकराटॉक्सिन ए नाम का माइकोटॉक्सिन बना सकती है। अगर इसे लंबे समय तक और ज्यादा मात्रा में खाया जाए, तो इससे किडनी और लिवर को नुकसान पहुंच सकता है। यह टॉक्सिन मध्यम गर्मी में भी नष्ट नहीं होता, इसलिए खाना पकाने से भी यह जरूरी नहीं कि खत्म हो जाए। यही वजह है कि खाने में इस्तेमाल करने से पहले इसकी ठीक से जांच करना बहुत जरूरी है।

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