भागलपुर में विक्रमशिला पुल गंगा नदी में गिरा: 16 जिलों की लाइफलाइन ठप, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सस्पेंड

बिहार|04 मई 2026
16 जिलों की लाइफलाइन ठप, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सस्पेंड

भागलपुर में स्थित विक्रमशिला सेतु का एक बड़ा हिस्सा रविवार देर रात गंगा नदी में गिर गया। करीब 4.7 किलोमीटर लंबे इस पुल का लगभग 34 मीटर का स्लैब अचानक धंस गया। राहत की बात यह रही कि प्रशासन ने पहले ही ट्रैफिक रोक दिया था। इससे बड़ा हादसा टल गया। यह पुल सीमांचल समेत करीब 16 जिलों की कनेक्टिविटी का प्रमुख जरिया है। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया।

रविवार शाम को ही पुल के एक्सपेंशन जॉइंट में हलचल देखी गई थी। करीब 10 इंच का गैप बढ़ने लगा। प्रशासन को इसकी सूचना मिली। देर रात करीब 12:35 बजे स्थिति बिगड़ गई। अचानक पुल का एक बड़ा हिस्सा गंगा में समा गया। उस समय पुल पर वाहनों की लंबी कतार थी। लेकिन पुलिस की तत्परता से सभी गाड़ियों को पहले ही हटा लिया गया था। यही कारण रहा कि कोई जनहानि नहीं हुई। अधिकारियों के अनुसार यह तकनीकी और मेंटेनेंस से जुड़ी गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है।

कनेक्टिविटी पर बड़ा असर

यह पुल भागलपुर को नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया और सीमांचल के अन्य जिलों से जोड़ता है। रोजाना करीब एक लाख लोग इस पुल से सफर करते हैं। लगभग 50 हजार छोटे-बड़े वाहन यहां से गुजरते हैं। पुल बंद होने के बाद लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अब ट्रैफिक को मुंगेर पुल की ओर डायवर्ट किया गया है। इससे दूरी और समय दोनों बढ़ गए हैं। स्थानीय व्यापार और सप्लाई चेन पर भी इसका असर साफ दिख रहा है।

बैरिकेडिंग और वैकल्पिक व्यवस्था शुरू

घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग कर दी। पुलिस बल तैनात कर दिया गया। किसी को भी पुल के पास जाने की अनुमति नहीं है। जिला प्रशासन ने वैकल्पिक रूट तैयार किए हैं। ट्रैफिक को डायवर्ट किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि नया स्लैब तैयार कर उसे लगाने में कम से कम 15 दिन का समय लगेगा। इस दौरान लोगों को असुविधा झेलनी पड़ेगी।

इंजीनियर सस्पेंड, हाई लेवल जांच

घटना के बाद पथ निर्माण विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। एक हाई लेवल कमेटी जल्द ही मौके का निरीक्षण करेगी। अधिकारियों का कहना है कि पहले भी पुल की स्थिति को लेकर रिपोर्ट भेजी गई थी। लेकिन समय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए। यही लापरवाही अब सामने आई है।

बार-बार रिपेयर, फिर भी नहीं मिला स्थायी समाधान

पिछले 10 वर्षों में इस पुल की तीन बार मरम्मत हो चुकी है। 2016 और 2020 में बड़े स्तर पर काम हुआ था। मार्च 2026 में भी रिपेयरिंग की गई थी। इसके बावजूद समस्या बनी रही। हाल ही में पिलर संख्या 17, 18 और 19 की प्रोटेक्शन वॉल भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि तेज बहाव और भारी लोड के कारण पिलरों पर दबाव बढ़ रहा है। इसके बावजूद पर्याप्त सुधार नहीं किया गया।

लोगों की मजबूरी

पुल बंद होने के बाद लोग नाव के सहारे गंगा पार कर रहे हैं। बरारी घाट पर भारी भीड़ देखने को मिल रही है। यात्रियों को नाव से उतरने के बाद कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय पर मेंटेनेंस होता तो यह स्थिति नहीं आती। अब आम जनता को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है।

आर्मी से मदद की मांग

मुख्यमंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। केंद्र सरकार से बातचीत की गई है। पुल की मरम्मत के लिए आर्मी की मदद मांगी गई है। सरकार जल्द से जल्द कनेक्टिविटी बहाल करने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों का दावा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जल्द समाधान निकाला जाएगा।

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