पहलगाम हमले की जांच में बड़ा खुलासा: कराची-लाहौर से पहुंचे आतंकियों के मोबाइल, बैसरन घाटी की लोकेशन और स्क्रीनशॉट मिले

नई दिल्ली|1 घंटा पहले
कराची-लाहौर से पहुंचे आतंकियों के मोबाइल, बैसरन घाटी की लोकेशन और स्क्रीनशॉट मिले

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी को मामले में महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। एजेंसी के अनुसार, हमले में शामिल आतंकियों के पास से बरामद दो मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं। जो हमले की साजिश और उसके इंटरनेशनल नेटवर्क की ओर संकेत करते हैं। जांच में पता चला है कि आतंकियों के कब्जे से मिले दोनों स्मार्टफोन पाकिस्तान के कराची और लाहौर के रास्ते वहां की सप्लाई चेन के माध्यम से पहुंचे थे। मोबाइल फोन में बैसरन घाटी से जुड़ी लोकेशन, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल जानकारियां भी मिली हैं। जिससे यह स्पष्ट होता है कि हमले की तैयारी पहले से सुनियोजित तरीके से की गई थी।

एनआईए के अनुसार, 28 जुलाई को सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के पास से एक Redmi 9T और दूसरा Redmi Note 12 मोबाइल बरामद किया गया था। तकनीकी विश्लेषण के दौरान दोनों उपकरणों की सप्लाई हिस्ट्री और डिजिटल डेटा की जांच की गई। जांच में सामने आया कि Redmi 9T वर्ष 2021 में पाकिस्तान के कराची स्थित आयात नेटवर्क के माध्यम से पहुंचा था। वहीं Redmi Note 12 को वर्ष 2023 में लाहौर की एक बड़ी मोबाइल वितरण कंपनी द्वारा आयात किया गया था। दोनों मोबाइल लंबे समय तक निष्क्रिय रहे। कथित तौर पर हमले से कुछ समय पहले ही सक्रिय किए गए।

बैसरन घाटी की रेकी के मिले डिजिटल साक्ष्य

फोरेंसिक जांच के दौरान मोबाइल में मौजूद नेविगेशन एप्लिकेशन और डिजिटल रिकॉर्ड से यह भी पता चला कि पहलगाम की बैसरन घाटी हमले का प्रमुख लक्ष्य थी। जांच एजेंसी को मोबाइल में बैसरन क्षेत्र की सेव की गई लोकेशन और कई स्क्रीनशॉट मिले। जिन्हें हमले से कुछ दिन पहले डाउनलोड या सुरक्षित किया गया था। अधिकारियों का मानना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि आतंकियों ने हमले से पहले क्षेत्र की रेकी और रणनीतिक तैयारी की थी। हालांकि मोबाइल से कोई कॉल रिकॉर्ड, चैट या सोशल मीडिया कम्युनिकेशन बरामद नहीं हुआ है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आतंकियों ने पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क के बजाय लंबी दूरी की रेडियो संचार प्रणाली का इस्तेमाल किया। जिससे डिजिटल ट्रैकिंग मुश्किल हो गई। यही कारण है कि मोबाइल उपकरणों में सामान्य संचार गतिविधियों का रिकॉर्ड नहीं मिला।

गोप्रो कैमरा और इंटरनेशनल नेटवर्क की भी जांच

इससे पहले जांच एजेंसी ने खुलासा किया था कि मारे गए आतंकियों के पास से एक हाई-टेक GoPro कैमरा भी बरामद हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह कैमरा चीन के रास्ते आतंकी नेटवर्क तक पहुंचा था। एजेंसी अब उन संभावित सप्लाई चैनलों, बिचौलियों और सहयोगी नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। जिनके माध्यम से तकनीकी उपकरण आतंकियों तक पहुंचाए गए।

चार्जशीट में पाकिस्तान कनेक्शन का दावा

एनआईए द्वारा दाखिल चार्जशीट में भी हमले के पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क की भूमिका का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि हमले का मास्टरमाइंड पाकिस्तान में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा संचालक था। जिसने हमले के दौरान आतंकियों को रियल-टाइम निर्देश दिए। एजेंसी के अनुसार, पहलगाम हमले में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय नागरिक की मौत हुई थी। मामले की जांच अभी भी जारी है। सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों के लॉजिस्टिक तथा तकनीकी नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

नव्य जागरण

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