लाल किला ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: डॉक्टर चला रहे थे आतंकी नेटवर्क, NIA ने 7500 पन्नों की दाखिल की चार्जशीट

दिल्ली|14 मई 2026
डॉक्टर चला रहे थे आतंकी नेटवर्क, NIA ने 7500 पन्नों की दाखिल की चार्जशीट

दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने 7500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। यह चार्जशीट पटियाला हाउस स्थित स्पेशल कोर्ट में पेश हुई। मामले में 10 आरोपियों को नामजद किया गया है। एजेंसी का दावा है कि आरोपी संगठित आतंकी नेटवर्क चला रहे थे। 10 नवंबर 2025 की शाम दिल्ली दहल उठी थी। लाल किले के पास जोरदार कार बम धमाका हुआ। धमाके में 11 लोगों की मौत हुई थी। कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। ब्लास्ट के बाद पूरे दिल्ली-NCR में हाई अलर्ट घोषित किया गया।

NIA जांच में बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। गिरफ्तार आठ आतंकियों में पांच डॉक्टर बताए गए हैं। एजेंसी के मुताबिक ये लोग कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। मेडिकल प्रोफेशन की आड़ में आतंकी नेटवर्क चलाया जा रहा था। चार्जशीट में पुलवामा निवासी डॉ. उमर उन नबी का भी नाम है। उसकी मौत हो चुकी है। वह हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर रह चुका था। जांच एजेंसी के मुताबिक 2022 में श्रीनगर में गुप्त बैठक हुई। वहां “AGuH Interim” नाम से संगठन फिर सक्रिय किया गया। इसके बाद “Operation Heavenly Hind” शुरू किया गया।

खुद तैयार किया गया TATP विस्फोटक

NIA ने खुलासा किया कि धमाके में TATP विस्फोटक इस्तेमाल हुआ। यह बेहद खतरनाक हाई-इंटेंसिटी एक्सप्लोसिव माना जाता है। आरोपियों ने इसे खुद तैयार किया था। इसके लिए केमिकल ऑनलाइन और ऑफलाइन खरीदे गए। जरूरी उपकरण अलग-अलग जगहों से जुटाए गए। आरोपी लगातार नए सदस्यों की भर्ती भी कर रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी AK-47 और Krinkov राइफल जुटा रहे थे। साथ ही ड्रोन और रॉकेट आधारित IED पर प्रयोग हो रहा था। एजेंसी अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

पाकिस्तानी हैंडलर्स से सीधा संपर्क

आतंकियों ने तकनीक का इस्तेमाल बेहद सावधानी से किया। एजेंसी के मुताबिक आरोपी घोस्ट सिम कार्ड इस्तेमाल करते थे। इससे वे सुरक्षा एजेंसियों से बचने की कोशिश करते थे। हर आरोपी के पास दो से तीन मोबाइल रहते थे। एक फोन सामान्य इस्तेमाल के लिए रखा जाता था। दूसरा फोन सिर्फ आतंकी नेटवर्क के लिए इस्तेमाल होता था। आरोपी वॉट्सऐप और टेलीग्राम के जरिए बात करते थे। बिना फिजिकल सिम वाले डिवाइस का भी इस्तेमाल हुआ। यूट्यूब वीडियो से IED बनाना सिखाया जाता था। वहीं से हमले के निर्देश भी मिलते थे।

जैश और AQIS से जुड़े लिंक मिले

NIA को जांच में कई आतंकी संगठनों के लिंक मिले। एजेंसी के मुताबिक नेटवर्क का संबंध AQIS और जैश-ए-मोहम्मद से था। डिजिटल सबूत भी एजेंसी के हाथ लगे हैं। रिपोर्ट में महिला आतंकी विंग का भी जिक्र हुआ। बताया गया कि अक्टूबर 2025 में मसूद अजहर ने नई विंग बनाई। इसका नाम जमात-उल-मुमिनात रखा गया था। यह विंग आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने के लिए बनाई गई थी। हालांकि यह संगठन अभी UN की सूची में शामिल नहीं है। NIA अब फरार आतंकियों की तलाश में जुटी है। कई राज्यों में छापेमारी जारी है। मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बेहद संवेदनशील केस माना जा रहा है।

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