रेप के दो दोषियों को 10 और 22 वर्ष का कठोर कारावास: पॉक्सो मामलों में अदालत का कड़ा रुख, छेड़छाड़ के आरोपी को पांच वर्ष की सजा

महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों को लेकर कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। जनपद की विभिन्न विशेष कोर्ट ने नाबालिग से छेड़छाड़ और रेप के अलग-अलग मामलों में दोषियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह स्पष्ट संदेश दिया है कि ऐसे अपराधों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। अदालतों ने दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है। जिससे अपराध के प्रति समाज में प्रभावी निरोधात्मक संदेश जा सके।
विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट राकेश कुमार की अदालत ने सिकरीगंज थाना क्षेत्र के अलावलपुर निवासी कुर्बान अली को नाबालिग बच्ची से छेड़छाड़ के मामले में दोषी ठहराया है। दोषी को पांच वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार वर्ष 2020 में आरोपी ने टॉफी खरीदने आई बच्ची को बहाने से दुकान के अंदर ले जाकर उसके साथ गलत हरकत की थी। अर्थदंड जमा न करने पर अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान रखा गया है।
दोषियों पर लगाया फाइन
एक अन्य मामले में अपर सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश सुदेश कुमार ने शाहपुर क्षेत्र निवासी सचिन गुप्ता को रेप, उत्पीड़न और डिजिटल माध्यमों से पीड़िता को प्रताड़ित करने के मामले में 10 वर्ष के कठोर कारावास तथा 23 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट विजय बहादुर यादव की अदालत ने चार वर्षीय बच्ची के साथ रेप के मामले में गोरखनाथ क्षेत्र निवासी मुकेश कुमार को 22 वर्ष के कठोर कारावास और 30 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय के इस फैसले को महिला एवं बाल सुरक्षा के प्रति न्यायिक प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।
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