साहित्य की नई राजधानी बनेगा गोरखपुर: सीएम योगी करेंगे यूपी के पहले 'साहित्य पार्क' का शिलान्यास, 35 करोड़ से संवरेगी सांस्कृतिक विरासत

गोरखपुर|29 मई 2026
सीएम योगी करेंगे यूपी के पहले 'साहित्य पार्क' का शिलान्यास, 35 करोड़ से संवरेगी सांस्कृतिक विरासत

पूर्वांचल की सांस्कृतिक और साहित्यिक पहचान को नई ऊंचाई देने की दिशा में प्रदेश सरकार ने बड़ी पहल की है। मुख्यमंत्री वैश्विक नगरोदय योजना के तहत शहर में उत्तर प्रदेश का पहला साहित्य पार्क विकसित किया जाएगा। करीब 35 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निर्माण शहर के हरसेवकपुर क्षेत्र में किया जाएगा। परियोजना को लेकर प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर तैयारियां तेज हो गई हैं। जल्द ही निर्माण कार्य के लिए एजेंसी का चयन कर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

नगर निगम और जल निगम की संस्था कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएंडडीएस) यूनिट-42 इस परियोजना को मूर्त रूप देने में जुटी हुई है। अधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों इस परियोजना का शिलान्यास कराने की तैयारी चल रही है। सरकार की ओर से स्वीकृत धनराशि में पहली किस्त के रूप में 12 करोड़ 17 लाख रुपये पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा साहित्य पार्क

यह साहित्य पार्क राजस्व ग्राम हरसेवकपुर नंबर-दो में स्थित 8.50 एकड़ सीलिंग भूमि पर विकसित किया जाएगा। मुख्य अभियंता अमित शर्मा के अनुसार, परियोजना के लिए करीब 4.50 एकड़ भूमि की पैमाइश पूरी कर उपलब्ध करा दी गई है। पार्क को आधुनिक वास्तुकला और सांस्कृतिक थीम के आधार पर विकसित किया जाएगा। जिससे यह पूर्वांचल का प्रमुख पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र बन सके। परियोजना के तहत प्रवेश प्लाजा, फूड कोर्ट, सेवा प्रवेश द्वार, टिकट काउंटर और अत्याधुनिक 270 डिग्री प्रोजेक्शन थिएटर जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके अलावा बुक कैफे, एम्फीथिएटर, सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल, स्तूप टीला, हरित लॉन, तालाब और म्यूजिकल फाउंटेन भी पार्क का आकर्षण होंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह पार्क केवल मनोरंजन का केंद्र नहीं होगा, बल्कि साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म को एक मंच पर जोड़ने का माध्यम बनेगा।

साहित्य और अध्यात्म का मिलेगा संगम

साहित्य पार्क को पूर्वांचल और भारतीय संस्कृति से जुड़ी महान विभूतियों की स्मृतियों को समर्पित किया जाएगा। इसमें गुरु गोरक्षनाथ, महात्मा बुद्ध, संत कबीर और परमहंस योगानंद जैसे आध्यात्मिक महापुरुषों के विचारों और दर्शन को विशेष स्थान दिया जाएगा। वहीं साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने के लिए सम्राट मुंशी प्रेमचंद, रामप्रसाद बिस्मिल, फिराक गोरखपुरी और गीताप्रेस जैसी ऐतिहासिक पहचान को भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। पार्क परिसर में साहित्य, अध्यात्म और योग से जुड़े महापुरुषों की प्रतिमाएं और स्कल्पचर वॉल बनाई जाएंगी। साथ ही यहां ओपन लाइब्रेरी की सुविधा भी विकसित की जाएगी। जहां लोग खुले वातावरण में अध्ययन कर सकेंगे। डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देते हुए पार्क में क्यूआर कोड आधारित ई-बुक और ऑडियो बुक की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। जिससे युवा पीढ़ी आधुनिक माध्यमों से साहित्य से जुड़ सकेगी।

सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की पहल

नगर आयुक्त अजय जैन ने बताया कि साहित्य पार्क गोरखपुर की सांस्कृतिक और साहित्यिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि यह पार्क लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ साहित्य और अध्यात्म के संगम का अनुभव भी कराएगा। अधिकारियों के अनुसार, परियोजना पूरी होने के बाद यह स्थल पर्यटन, साहित्यिक आयोजनों और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन सकता है। साथ ही इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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