10 मई को होगा योगी कैबिनेट का विस्तार: कई नए चेहरों की एंट्री तय; ब्राह्मण-दलित-ओबीसी समीकरण साधने की तैयारी

लखनऊ|09 मई 2026
कई नए चेहरों की एंट्री तय; ब्राह्मण-दलित-ओबीसी समीकरण साधने की तैयारी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार करने जा रहे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों और 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी को देखते हुए यह विस्तार काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बार सरकार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने पर खास फोकस करेगी। सूत्रों के अनुसार, पांच से छह नए मंत्री शपथ ले सकते हैं, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है।

सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार शाम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से राजभवन में मुलाकात करेंगे। इसके बाद रविवार को मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया पूरी हो सकती है। राजनीतिक गलियारों में संभावित मंत्रियों के नामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। भाजपा संगठन और सरकार के बीच कई दौर की बैठकों के बाद संभावित चेहरों पर लगभग सहमति बन चुकी है। फिलहाल योगी सरकार में मुख्यमंत्री समेत कुल 54 मंत्री हैं। संवैधानिक सीमा के हिसाब से अभी छह और मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार पूरी क्षमता तक कैबिनेट का विस्तार करेगी।

सपा के बागियों को मिल सकता है बड़ा इनाम

इस विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाले नेताओं की हो रही है। सूत्रों के मुताबिक विधायक मनोज पांडेय और विधायक पूजा पाल को मंत्री बनाया जाना लगभग तय माना जा रहा है। मनोज पांडेय को ब्राह्मण चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा को उम्मीद है कि उन्हें मंत्री बनाने से पूर्वांचल और अवध क्षेत्र के ब्राह्मण मतदाताओं में सकारात्मक संदेश जाएगा। वहीं पूजा पाल को महिलाओं और पिछड़े वर्ग के बीच मजबूत चेहरा माना जा रहा है। उन्होंने कौशांबी और प्रयागराज में अपराध के खिलाफ लंबे समय तक संघर्ष किया है।

ब्राह्मण नाराजगी दूर करने पर फोकस

भाजपा इस समय ब्राह्मण समाज की नाराजगी को गंभीरता से ले रही है। हाल के महीनों में कई मुद्दों को लेकर ब्राह्मण समाज में असंतोष देखने को मिला है। शंकराचार्य विवाद, UGC नियम और भर्ती परीक्षा में विवादित सवाल जैसे मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ाई है। सूत्र बताते हैं कि इसी वजह से इस बार दो ब्राह्मण चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। पूर्व मंत्री श्रीकांत शर्मा और भाजपा प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला का नाम चर्चा में है। फिलहाल डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक समेत सात ब्राह्मण मंत्री सरकार में हैं। लेकिन पार्टी को लगता है कि 2027 से पहले इस वर्ग को और मजबूत संदेश देना जरूरी है।

दलित और पिछड़ा वर्ग भी रहेगा केंद्र में

योगी सरकार सामाजिक समीकरणों को लेकर बेहद सतर्क दिखाई दे रही है। यूपी विधानसभा की 86 सीटें अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित हैं। भाजपा के पास इनमें बड़ी संख्या में विधायक हैं। ऐसे में दलित वर्ग से भी एक या दो नए मंत्रियों को मौका दिया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक कृष्णा पासवान का नाम भी मंत्री पद की दौड़ में शामिल है। भाजपा दलित समाज में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। सरकार पहले ही अंबेडकर जयंती पर राज्यभर में बड़े कार्यक्रम आयोजित कर चुकी है। वहीं पिछड़े वर्ग से भी नए चेहरों को जगह मिलने की संभावना है। जाट समाज से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। इसके अलावा एमएलसी रामचंद्र प्रधान और हंसराज विश्वकर्मा का नाम भी चर्चा में है।

महिला चेहरों को भी मिल सकता है मौका

यूपी विधानसभा में इस समय 51 महिला विधायक हैं। भाजपा के पास इनमें सबसे ज्यादा महिला विधायक हैं। लेकिन सरकार में अभी केवल पांच महिला मंत्री हैं। ऐसे में इस बार महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी जोर दिया जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा महिलाओं, दलितों और पिछड़े वर्ग के बीच अपने समर्थन आधार को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। मंत्रिमंडल विस्तार इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

कुछ मंत्रियों का प्रमोशन भी संभव

मंत्रिमंडल विस्तार के साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों का प्रमोशन भी हो सकता है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा समाज कल्याण राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण और परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर सिंह की हो रही है। इसके अलावा जेपीएस राठौर, गुलाब देवी और दिनेश प्रताप सिंह को भी कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है। भाजपा संगठन इन नेताओं के कामकाज और राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी देने पर विचार कर रहा है।

2027 चुनाव की तैयारी का बड़ा संकेत

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ सामान्य कैबिनेट विस्तार नहीं है। यह 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की सामाजिक इंजीनियरिंग का बड़ा हिस्सा है। पार्टी हर वर्ग और क्षेत्र को साधने की कोशिश में जुटी है। रविवार का विस्तार यह तय करेगा कि भाजपा आने वाले चुनाव में किस सामाजिक समीकरण और रणनीति के साथ मैदान में उतरने जा रही है।

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