अखिलेश यादव ने I-PAC से तोड़ा करार: फंड की कमी बताई वजह, चुनावी रणनीति पर उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने चुनावी रणनीति बनाने वाली कंपनी I-PAC के साथ अपना करार खत्म कर दिया है। लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह जानकारी दी। उन्होंने साफ कहा कि कुछ समय तक कंपनी उनके साथ काम कर रही थी, लेकिन अब यह सहयोग जारी नहीं रह पाएगा। इसकी मुख्य वजह फंड की कमी बताई गई। अखिलेश ने कहा कि इतनी बड़ी प्रोफेशनल कंपनी को बनाए रखना उनकी पार्टी के लिए आर्थिक रूप से संभव नहीं है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने चुनावी कंसल्टेंसी कंपनियों पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि आजकल चुनाव जीतने के लिए अलग-अलग कंपनियों की सलाह दी जाती है। कोई सर्वे के लिए, कोई सोशल मीडिया के लिए और कोई निगेटिव कैंपेन के लिए। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि ऐसी कंपनियों से डील कर ली जाए कि अगर सरकार बन जाए तो उन्हें बड़ा बजट दे दिया जाएगा। इस बयान को उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए दिया।
2027 चुनाव की तैयारी पर असर
समाजवादी पार्टी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए I-PAC को जिम्मेदारी दी थी। यह कंपनी बूथ लेवल मैनेजमेंट, डेटा एनालिसिस और वोटर टर्नआउट बढ़ाने जैसे काम कर रही थी। बताया जाता है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अखिलेश को I-PAC के साथ काम करने की सलाह दी थी। लेकिन अब यह गठजोड़ टूट गया है।
करार टूटने की 3 बड़ी वजहें
इस फैसले के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण फंड की कमी है, जिसे अखिलेश ने खुद स्वीकार किया। दूसरा कारण कंपनी का हालिया प्रदर्शन है। कहा जा रहा है कि हाल के चुनावों में I-PAC कोई खास असर नहीं दिखा पाई। तीसरा कारण कानूनी और जांच एजेंसियों का डर बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नहीं चाहती कि उसकी रणनीति किसी जांच के दायरे में आए या लीक हो।
प्रशांत किशोर की कंपनी
I-PAC की स्थापना चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने की थी। इसे भारत की पहली प्रोफेशनल चुनावी कंसल्टेंसी कंपनी माना जाता है। इस कंपनी ने कई राज्यों में चुनावी जीत दिलाने में भूमिका निभाई थी। हालांकि हाल के वर्षों में प्रशांत किशोर ने इससे दूरी बना ली है। अब कंपनी का संचालन अन्य अधिकारी कर रहे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावी सिस्टम पर भी सवाल
अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनावी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनावों में पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने मांग की कि मतगणना की लाइव स्ट्रीमिंग होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि भविष्य में उनकी पार्टी बेहतर रणनीति के साथ मैदान में उतरेगी।
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