केजीएमयू में फर्जी डॉक्टर का खेल: 12वीं पास युवक छात्राओं को बना रहा था निशाना, धर्मांतरण एंगल की जांच तेज

लखनऊ|22 अप्रैल 2026
12वीं पास युवक छात्राओं को बना रहा था निशाना, धर्मांतरण एंगल की जांच तेज

लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक फर्जी डॉक्टर को पकड़कर पुलिस के हवाले किया है। आरोपी की पहचान हस्साम अहमद के रूप में हुई है, जो केवल 12वीं पास बताया जा रहा है। शुरुआती जांच में उसके धर्मांतरण से जुड़े नेटवर्क से संपर्क की आशंका भी जताई गई है। मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपी के मोबाइल और संपर्कों को खंगाला जा रहा है।

केजीएमयू प्रशासन के अनुसार आरोपी कैंपस में खुद को सीनियर या डॉक्टर बताकर घूमता था। वह छात्रों और छात्राओं पर रौब डालता था। खासकर एमबीबीएस की छात्राओं से वह संपर्क में था। आरोपी ने अपने व्हाट्सएप प्रोफाइल पर केजीएमयू के प्रवक्ता प्रो. केके सिंह की फोटो लगा रखी थी। इससे छात्र आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे। वह खुद को संस्थान का अधिकारी बताकर भरोसा जीतता था। इसके बाद वह छात्रों को अपने फर्जी नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश करता था।

फर्जी कॉन्फ्रेंस का लालच, दिल्ली ले जाने की तैयारी

आरोपी ने छात्राओं को एम्स दिल्ली में होने वाली कथित कॉन्फ्रेंस का झांसा दिया। उसने फर्जी आमंत्रण पत्र भी तैयार किया। इस पत्र पर प्रो. केके सिंह के नकली हस्ताक्षर थे। इसमें अमेरिका के नामी डॉक्टर से मिलने का दावा भी किया गया था। छात्राएं उसके प्रभाव में आ गई थीं। वह उन्हें 19 अप्रैल को दिल्ली ले जाने की तैयारी कर रहा था। इससे पहले वह उन्हें हुसैनाबाद में आयोजित एक कथित मेडिकल कैंप में भी ले गया था। जांच में यह कैंप भी फर्जी पाया गया।

प्रशासन की सतर्कता से खुला मामला

केजीएमयू प्रशासन को जब इस गतिविधि की जानकारी मिली तो तुरंत एक्शन लिया गया। पहले फर्जी आमंत्रण पत्र जब्त किया गया। फिर मेडिकल कैंप की जांच कराई गई। मंगलवार को आरोपी को जनरल सर्जरी विभाग के पास छात्रों की मदद से पकड़ लिया गया। इसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि वह केवल 12वीं पास है और कोई मेडिकल डिग्री नहीं रखता।

लालच और मानसिक प्रभाव से करता था शिकार

पूछताछ में सामने आया कि आरोपी “कॉर्डियो सेवा संस्थान” नाम से एक फर्जी ट्रस्ट चलाता था। इसके जरिए वह छात्रों को जोड़ने की कोशिश करता था। वह पुरस्कार, सम्मान और करियर ग्रोथ के झूठे वादे करता था। एक छात्रा पूरी तरह उसके प्रभाव में आ गई थी। उसने बताया कि आरोपी उसे लगातार मानसिक रूप से प्रभावित कर रहा था। वह उसके निर्देशों का पालन करने लगी थी। यह मामला अब गंभीर मनोवैज्ञानिक प्रभाव के एंगल से भी देखा जा रहा है।

संदिग्ध डॉक्टरों के नाम आए सामने

आरोपी ने पूछताछ में चार डॉक्टरों के नाम भी बताए हैं। ये सभी एक ही समुदाय से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनमें से दो डॉक्टर एक ही संकाय के हैं। हालांकि अभी उनकी संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है। साथ ही आरोपी का संबंध पहले गिरफ्तार किए गए डॉ. रमीज से भी जोड़ा जा रहा है। डॉ. रमीज को पहले धर्मांतरण और यौन शोषण के आरोप में जेल भेजा जा चुका है।

खंगाला जा रहा मोबाइल डेटा

एसीपी चौक राजकुमार सिंह के अनुसार आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड और चैट हिस्ट्री की जांच की जा रही है। पुलिस को शक है कि आरोपी का नेटवर्क बड़ा हो सकता है। वह अन्य विश्वविद्यालयों की छात्राओं के संपर्क में भी था।

छात्राओं के बयान होंगे दर्ज

मामले में शामिल छात्राओं के बयान दर्ज किए जाएंगे। खासकर वे छात्राएं जो मेडिकल कैंप में गई थीं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि आरोपी को कैंपस में किसकी मदद मिल रही थी। सूत्रों के अनुसार उसके कुछ सहयोगी भी हो सकते हैं। धर्मांतरण की कोशिशों की भी जांच की जा रही है।

गुमराह करता रहा आरोपी

जब प्रशासन ने उसे पकड़ा तो वह लगातार गुमराह करने की कोशिश करता रहा। वह सवालों के सीधे जवाब नहीं दे रहा था। कड़ाई से पूछताछ के बाद ही उसने सच्चाई कबूली। पुलिस का कहना है कि अगर और पीड़ित सामने आते हैं तो केस में नई धाराएं जोड़ी जाएंगी। माना जा रहा है कि आरोपी के पकड़े जाने के बाद और भी खुलासे हो सकते हैं।

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