सामान्य अपराधिक केस में नौकरी से इंकार नहीं कर सकते: हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अभ्यर्थी के पक्ष में दिया महत्वपूर्ण फैसला, सिपाही के पद पर नियुक्ति का दिया आदेश

लखनऊ|05 अप्रैल 2026
हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अभ्यर्थी के पक्ष में दिया महत्वपूर्ण फैसला, सिपाही के पद पर नियुक्ति का दिया आदेश

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सरकारी नौकरी के लिए संघर्ष कर एक अभ्यर्थी के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ सामान्य आपराधिक मुकदमा लंबित होना, उसे नौकरी देने से इन्कार करने का सही आधार नहीं हो सकता। अदालत ने उत्तर प्रदेश सिविल पुलिस में कांस्टेबल पद पर चयनित अभ्यर्थी को नियुक्ति देने का आदेश दिया है।

यह फैसला न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने उन्नाव जिले के माखी थाना क्षेत्र निवासी उमेश की याचिका पर सुनाया। उमेश का चयन यूपी पुलिस में सिपाही पद के लिए हुआ था। भर्ती प्रक्रिया के दौरान उन्होंने चरित्र प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया, लेकिन उनके और उनके पिता के खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले के कारण जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने प्रमाण पत्र जारी करने से इन्कार कर दिया।

गांव की युवती ने दर्ज कराया था रेप का केस

मामला गांव की एक महिला द्वारा दर्ज कराए गए रेप समेत अन्य आरोपों से जुड़ा था। जांच के दौरान पुलिस ने उमेश का नाम केस से हटा दिया था, जबकि उनके पिता के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। बाद में महिला ने अदालत में आवेदन देकर उमेश को भी मामले में तलब करा लिया, जिसके आधार पर प्रशासन ने उनका चरित्र प्रमाण पत्र रोक दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि केवल सामान्य आरोपों के आधार पर नियुक्ति रोकना कानूनन सही नहीं है। कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया कि उमेश को तुरंत चरित्र प्रमाण पत्र जारी कर नियुक्ति पत्र दिया जाए।

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