प्रदेश में निरस्त हो सकते हैं हजारों शस्त्र लाइसेंस: दागियों पर कसेगा शिकंजा, अखिलेश ने भाजपा पर साधा निशाना

उत्तर प्रदेश में आपराधिक छवि वाले लाइसेंसी शस्त्र धारकों के खिलाफ अब बड़ा प्रशासनिक और कानूनी अभियान शुरू होने जा रहा है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और निर्देशों के बाद प्रदेश सरकार ने दागी और बाहुबली छवि वाले लोगों को जारी किए गए शस्त्र लाइसेंसों की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। गृह विभाग ने सभी जिलों से ऐसे लाइसेंस धारकों का विस्तृत ब्यौरा तलब किया है, जिनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए जा सकते हैं।
प्रदेश में लंबे समय से लाइसेंसी हथियारों को शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक रसूख के प्रतीक के तौर पर देखा जाता रहा है। कई बाहुबली और प्रभावशाली लोगों पर नियमों को दरकिनार कर शस्त्र लाइसेंस हासिल करने के आरोप भी लगते रहे हैं। अब हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने खासकर रघुराज प्रताप सिंह, धनंजय सिंह, सुशील सिंह, बृज भूषण शरण सिंह, विनीत सिंह समेत अन्य चर्चित चेहरों के असलहों के बारे में पूरी रिपोर्ट मांगी है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद हरकत में गृह विभाग
सूत्रों के मुताबिक गृह विभाग ने जिलाधिकारियों और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी लाइसेंस धारकों की सूची तैयार की जाए, जिन पर दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इसके साथ यह भी जांचा जा रहा है कि किन परिस्थितियों में उन्हें शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए थे। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि कहीं नियमों की अनदेखी कर राजनीतिक दबाव या प्रभाव के आधार पर लाइसेंस तो नहीं दिए गए। बताया जा रहा है कि जिन मामलों में अनियमितता सामने आएगी, वहां केवल लाइसेंस धारकों पर ही नहीं बल्कि संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है। इस कदम से प्रशासनिक महकमे में भी हलचल तेज हो गई है।
प्रदेश में 10 लाख से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को जानकारी दी है कि उत्तर प्रदेश में इस समय 10 लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंस जारी हैं। इनमें छह हजार से ज्यादा ऐसे लोग शामिल हैं, जिन पर दो या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। अदालत ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा था कि सार्वजनिक रूप से हथियारों का प्रदर्शन समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है। हाईकोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 26 मई को प्रस्तावित है, जिस पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।
सियासत भी हुई तेज
शस्त्र लाइसेंसों की समीक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि समाज में कुछ “अदृश्य शस्त्र” भी सक्रिय हैं, जो आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द पर अंदरूनी हमला कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर जांच हो रही है तो भाजपा नेताओं की संपत्तियों, चंदे और फंडिंग की भी पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।
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