यूपी में पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने पर रोक : सीएम योगी ने जांच के दिए निर्देश, तकनीकी जांच के लिए हाई लेवल कमेटी गठित

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। अब पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। यह निर्णय योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लिया गया है। पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि तकनीकी जांच पूरी होने तक पुराने मीटर जैसे हैं वैसे ही लगे रहेंगे। हालांकि, नए बिजली कनेक्शन स्मार्ट मीटर के जरिए ही दिए जाएंगे। इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश में चर्चा तेज हो गई है। उपभोक्ताओं के बीच भी इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए चार सदस्यीय हाई लेवल तकनीकी समिति बनाई गई है। यह समिति स्मार्ट मीटर की परफॉर्मेंस और क्वालिटी की जांच करेगी। इस कमेटी में आईआईटी कानपुर के दो प्रोफेसर शामिल हैं। इसके अलावा वडोदरा की इलेक्ट्रिकल रिसर्च एंड डेवलपमेंट एसोसिएशन के एक सीनियर अधिकारी और पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (वितरण) भी सदस्य हैं। टीम को एक्सपर्ट लेवल पर जांच की जिम्मेदारी दी गई है।
10 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
इस समिति का गठन 12 अप्रैल को किया गया था। समिति को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वह सभी तरह के स्मार्ट मीटरों का तकनीकी परीक्षण करे। इसके बाद 10 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपे। पावर कॉरपोरेशन के चेयरमैन और अपर मुख्य सचिव ऊर्जा डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बताया कि जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक मीटर बदलने का काम रोक दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।
नए कनेक्शन में स्मार्ट मीटर अनिवार्य
भले ही पुराने मीटर बदलने पर रोक लगी है, लेकिन नए कनेक्शन के नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। नए उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर ही दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि स्मार्ट मीटर भविष्य की जरूरत हैं। इससे बिलिंग सिस्टम बेहतर होता है। बिजली चोरी पर भी लगाम लगती है। लेकिन फिलहाल जो शिकायतें आ रही हैं, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
85 लाख स्मार्ट मीटर पहले ही लगाए जा चुके
प्रदेश में बड़े स्तर पर स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। अब तक करीब 85 लाख स्मार्ट मीटर इंस्टॉल हो चुके हैं। इनमें से कई उपभोक्ताओं ने तकनीकी दिक्कतों की शिकायत की है। कहीं रीडिंग गलत आ रही है। कहीं कनेक्टिविटी की समस्या है। कई जगह बिल ज्यादा आने की शिकायत भी सामने आई है। यही वजह है कि सरकार को जांच का फैसला लेना पड़ा।
शिकायतों के बाद सीएम ने दिए जांच के निर्देश
लगातार मिल रही शिकायतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी। उपभोक्ताओं ने मीटर की सटीकता और नेटवर्क को लेकर सवाल उठाए। इसी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के हित से कोई समझौता नहीं होगा।
अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर
ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।










