नाबालिग से रेप के दोषी को 20 साल की सजा: पॉक्सो कोर्ट ने लगाया जुर्माना, फरवरी 2024 में दर्ज हुआ था केस

उत्तरप्रदेश|8 घंटे पहले
पॉक्सो कोर्ट ने लगाया जुर्माना, फरवरी 2024 में दर्ज हुआ था केस

बस्ती की विशेष पॉक्सो अदालत ने नाबालिग किशोरी से रेप के मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 21 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। विशेष न्यायाधीश/पॉक्सो कोर्ट द्वारा बुधवार को सुनाया गया यह फैसला महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में सख्त न्यायिक रुख के रूप में देखा जा रहा है। अभियोजन पक्ष ने इसे उत्तर प्रदेश पुलिस के “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान की बड़ी सफलता बताया है।

यह मामला मुंडेरवा थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़िता पक्ष की ओर से 18 फरवरी 2024 को रेप का केस दर्ज कराया गया था। मामले में आरोपी की पहचान अरईल दीगर पट्टी निवासी रघुवर यादव के रूप में हुई थी। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर विवेचना आगे बढ़ाई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई थी।

साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने माना दोषी

विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष गवाहों के बयान, मेडिकल साक्ष्य और अन्य दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत किए। अदालत ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराध समाज के लिए गंभीर चुनौती हैं। ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि समाज में मजबूत संदेश जाए।

ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी

डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशन में पैरवी सेल और मुंडेरवा थाना पुलिस ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की। पुलिस विभाग का कहना है कि “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के तहत गंभीर अपराधों में त्वरित और मजबूत पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसी रणनीति के तहत इस मामले में भी अभियोजन पक्ष ने मजबूत तरीके से अपना पक्ष रखा, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी को कठोर सजा मिली।

पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत

अदालत के फैसले के बाद पीड़िता पक्ष ने संतोष जताया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषियों को सख्त सजा मिलने से पीड़ित परिवारों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़ता है। वहीं लीगल एक्सपर्ट्स का मानना है कि पॉक्सो एक्ट के तहत लगातार हो रही सख्त कार्रवाई समाज में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश है। पुलिस अधिकारियों ने भी कहा कि महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराध के मामलों में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी और दोषियों को कानून के दायरे में लाने के लिए अभियान जारी रहेगा।

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