राजकुमार हत्याकांड में शिकंजा कसा: नौ आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट, अवैध संपत्तियों की होगी जांच

चिलुआताल थाने के चर्चित राजकुमार चौहान हत्याकांड में पुलिस ने बुधवार को अब गैंगस्टर एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए नौ आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस पहले ही एक नाबालिग समेत दस आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। अब गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई के बाद आरोपियों की अवैध संपत्तियों की भी जांच शुरू की जाएगी। दूसरी ओर शुरुआती एफआईआर में नामजद किए गए छह लोगों, जिनमें एक पार्षद भी शामिल हैं। जांच में साक्ष्य न मिलने के चलते पार्षद को क्लीन चिट मिलने की संभावना जताई जा रही है। मामले ने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नया मोड़ ले लिया है।
17 मार्च की सुबह करीब 6:15 बजे प्रॉपर्टी डीलर राजकुमार चौहान की चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। मृतक की पत्नी सुशीला देवी की तहरीर पर पुलिस ने कई नामजद और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। शुरुआती जांच में पुलिस ने राज चौहान उर्फ निरहू और विपिन यादव को हत्या का मुख्य आरोपी माना और घटना के कुछ ही घंटों के भीतर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। बाद में जांच का दायरा बढ़ने पर साजिश रचने और साक्ष्य छिपाने के आरोप में कई अन्य लोगों की गिरफ्तारी की गई।
मामले की जांच कर रही पुलिस
चिलुआताल थाने में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में लालजी यादव उर्फ गट्टू, राज चौहान उर्फ निरहू, विपिन यादव, दीपक गौड़, शेषनाथ यादव, अंकित यादव, देवव्रत यादव, मनीष यादव और सचिन यादव को आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार इन सभी की घटना में सक्रिय भूमिका सामने आई है। एसपी नार्थ ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई शुरू कर दी गई है और अब उनकी अवैध संपत्तियों को भी चिह्नित किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि मामले में आर्थिक नेटवर्क और आपराधिक गठजोड़ की भी जांच की जा रही है।
पार्षद समेत छह लोगों को मिल सकती है राहत
मामले की विवेचना अब गोरखनाथ थाना पुलिस को सौंप दी गई है। जांच के दौरान बरगदवा के पार्षद धर्मदेव चौहान, धरमपाल चौहान, अमर सिंह चौधरी, मोनू पांडेय, सत्येंद्र चौधरी उर्फ टिल्लू और अभय पांडेय के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक इन लोगों की हत्या की साजिश या घटना में प्रत्यक्ष संलिप्तता साबित नहीं हो सकी है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही उन्हें औपचारिक रूप से क्लीन चिट दी जा सकती है। हालांकि मृतक पक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी को बताया अवैध
मामले में उस समय नया मोड़ आ गया, जब हत्या के आरोपी लालजी यादव उर्फ गट्टू की गिरफ्तारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध घोषित कर दिया। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि गिरफ्तारी के समय संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि आरोपी और उसके परिजनों को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी नहीं दी गई, जो संविधान के अनुच्छेद 22(1) का उल्लंघन है। कोर्ट ने 21 मार्च 2026 के रिमांड आदेश को भी निरस्त कर दिया और तत्काल रिहाई के निर्देश जारी किए।
जांच अधिकारी पर भी गिरी गाज
हाईकोर्ट ने मामले में लापरवाही बरतने वाले जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। अदालत ने जिला जज और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आदेश की प्रति भेजते हुए तीन दिन के भीतर जांच शुरू करने को कहा है। वहीं, रिमांड मजिस्ट्रेट को भी भविष्य में अधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। दूसरी ओर राजकुमार चौहान की पत्नी ने पहले ही चिलुआताल पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए विवेचना ट्रांसफर करने की मांग की थी, जिसके बाद केस को गोरखनाथ पुलिस को सौंप दिया गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले में नए सिरे से साक्ष्य जुटाने और आरोपियों की भूमिका को लेकर विस्तृत जांच कर रही है।
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