अलीगढ़ का नाम हो हरिगढ़- रामभद्राचार्य: मथुरा, काशी और संभल पर कोई समझौता नहीं, लव जिहाद और अतिक्रमण पर जताई चिंता

उत्तरप्रदेश|1 घंटा पहले
मथुरा, काशी और संभल पर कोई समझौता नहीं, लव जिहाद और अतिक्रमण पर जताई चिंता

अलीगढ़ के अकराबाद क्षेत्र स्थित लधौआ गांव में आयोजित रामकथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी। कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के साथ एक लंबे संघर्ष का महत्वपूर्ण चरण पूरा हो चुका है। अब मथुरा, काशी तथा संभल से जुड़े धार्मिक स्थलों को लेकर भी हिंदू समाज की भावनाएं प्रबल हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन मुद्दों पर कोई समझौता नहीं होगा। समाज अपनी आस्था से जुड़े स्थलों के संरक्षण एवं सम्मान के लिए प्रयास जारी रखेगा।

रामभद्राचार्य ने अपने संबोधन में अलीगढ़ के नाम परिवर्तन का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि यहां की जनता स्वयं को रामभक्त मानती है तो अलीगढ़ का नाम बदलकर ‘हरिगढ़’ किया जाना चाहिए। उनके इस बयान पर कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक विरासत को संरक्षित करना समय की आवश्यकता है। ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व वाले स्थलों को उनके मूल स्वरूप में सम्मान मिलना चाहिए।

कानून के दायरे में हो मामलों का समाधान

कथा के दौरान रामभद्राचार्य ने सामाजिक विषयों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि समाज को अपनी बेटियों की सुरक्षा और जागरूकता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सामाजिक सौहार्द और पारिवारिक मूल्यों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने भूमि अतिक्रमण से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया। कहा कि किसी भी प्रकार की अवैध कब्जेदारी को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। कानून के दायरे में रहकर ऐसे मामलों का समाधान होना चाहिए।

राम जन्मभूमि आंदोलन और भविष्य की प्रतिज्ञा

जगद्गुरु ने अपने संबोधन में राम जन्मभूमि आंदोलन के दिनों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में अनेक लोगों ने संघर्ष किया, जेल गए और विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना किया। उन्होंने बताया कि राम जन्मभूमि मामले में उन्होंने स्वयं कोर्ट में गवाही दी थी। अंततः मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। उन्होंने कहा कि यह केवल एक धार्मिक विजय नहीं है। करोड़ों लोगों की आस्था का सम्मान है।

राम और सीता की लीलाओं का किया वर्णन

अपने प्रवचन के आध्यात्मिक भाग में रामभद्राचार्य ने भगवान श्रीराम और माता सीता की लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने याज्ञवल्क्य और भारद्वाज संवाद का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम केवल एक आदर्श राजा नहीं हैं। परमब्रह्म के स्वरूप हैं। उन्होंने बताया कि मन, वाणी और शरीर से होने वाले विभिन्न प्रकार के दोषों को दूर करने में रामकथा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कथा के समापन पर उन्होंने कहा कि श्रीराम और माता सीता की लीलाओं का स्मरण मनुष्य के जीवन में सकारात्मकता, मर्यादा और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है। रामकथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। देर शाम तक भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।

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