रिश्वतखोर दरोगा रंगे हाथ गिरफ्तार: 'दो किलो अनार' बना घूस का कोडवर्ड, 20 हजार लेते एंटी करप्शन ने दबोचा

गंगानगर थाने में तैनात एक दरोगा को जांच प्रभावित करने के बदले 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ अरेस्ट कर लिया। आरोपी दरोगा प्रकाश चंद्र पर एक मुकदमे में नाम हटाने और जांच में राहत देने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप है। रिश्वत मांगने के लिए उसने 'अनार' शब्द को कोडवर्ड बनाया था। पीड़ित की शिकायत के बाद एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया और पुलिस लाइन के गेट नंबर-3 के पास आरोपी को नकदी लेते ही अरेस्ट कर लिया।
पीड़ित ने बताया कि दरोगा प्रकाश चंद्र ने सीधे रुपये मांगने के बजाय कोड भाषा का इस्तेमाल किया। उसने कहा कि "दो किलो अनार" लेकर आना। जब पीड़ित ने इसका अर्थ पूछा तो दरोगा ने बताया कि एक किलो अनार का मतलब 10 हजार रुपये है। इसके बाद पीड़ित ने पूरे मामले की जानकारी एंटी करप्शन टीम को दी। टीम के निर्देश पर उसने दरोगा को फोन कर बताया कि वह "अनार" लेकर पहुंच गया है। दरोगा ने उसे पुलिस लाइन के गेट नंबर-3 के पास बुलाया। जहां रुपये लेते ही टीम ने उसे पकड़ लिया।
जमीन विवाद से शुरू हुआ मामला
जानकारी के अनुसार, मुजफ्फरनगर के शामली क्षेत्र के घटायन गांव निवासी संगीता ने आर्थिक तंगी के कारण अपनी जमीन का सौदा गंगानगर निवासी रिश्तेदार नमन चौधरी से किया था। तय समय पर रजिस्ट्री नहीं होने के बाद सौदा निरस्त हो गया। नमन ने अग्रिम राशि वापस मांगनी शुरू कर दी। बाद में गांव की पंचायत में यह सहमति बनी कि जमीन बिकने के बाद अग्रिम धनराशि लौटा दी जाएगी। इस पर दोनों पक्ष राजी हो गए थे।
मुकदमे के बाद रिश्वत की मांग का आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पंचायत के बावजूद नमन चौधरी ने धोखाधड़ी का केस दर्ज करा दिया। जांच के दौरान दरोगा प्रकाश चंद्र ने निष्पक्ष जांच करने और नाम हटाने के बदले पहले दो लाख रुपये की मांग की। बाद में रकम घटाकर एक लाख, फिर 50 हजार और अंततः 20 हजार रुपये पर सहमति बनी। 30 जून को तय योजना के अनुसार पीड़ित ने एंटी करप्शन टीम की मौजूदगी में रुपये सौंपे और दरोगा रंगे हाथ पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को सिविल लाइंस थाने लाकर पूछताछ की गई। मामले में आगे की विधिक कार्रवाई जारी है।
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