नगर निगम सदन में भारी हंगामा: शोक प्रस्ताव पर आपस में भिड़े पार्षद, मेयर ने स्थगित की बैठक

उत्तरप्रदेश|6 घंटे पहले
शोक प्रस्ताव पर आपस में भिड़े पार्षद, मेयर ने स्थगित की बैठक

नगर निगम सदन की 18वीं बैठक भारी हंगामे के बीच शुरू हुई। जो कुछ ही देर बाद स्थगित करनी पड़ी। हुमायूंपुर उत्तरी की दिवंगत पूर्व पार्षद रोजा खातून का शोक प्रस्ताव एजेंडे में शामिल न होने पर पार्षदों ने तीखी नाराजगी जताई। कई पार्षद अपनी सीटों से उठकर मंच के पास पहुंच गए और नगर निगम प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी रही। बाद में मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने दो मिनट का मौन रखवाकर शोक सभा की और सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

नगर निगम सदन हाल में बैठक की शुरुआत से ही विरोध के स्वर सुनाई देने लगे। पूर्वाह्न करीब 11:40 बजे जैसे ही मेयर और नगर आयुक्त बैठक में पहुंचे। देर से पहुंचने पर बेतियाहाता के पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सभी पार्षद काफी देर से बैठक का इंतजार कर रहे थे, जबकि मेयर और नगर आयुक्त अन्य कार्यक्रमों में व्यस्त थे। यदि बैठक में देरी होनी थी तो इसकी सूचना पहले दी जानी चाहिए थी। इस टिप्पणी के बाद सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया और माहौल गरमा गया।

पूर्व नगर आयुक्त की विदाई को लेकर भी उठा सवाल

हंगामे के बीच रघुपति सहाय फिराक नगर के पार्षद रविंद्र ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पुराने नगर आयुक्त की विदाई कार्यक्रम की जानकारी पार्षदों को नहीं दी गई। जिससे जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा हुई है। इस मुद्दे पर भी सदन में काफी देर तक बहस और नारेबाजी होती रही। इसी दौरान दिग्विजय नगर के पार्षद ऋषि मोहन वर्मा ने हुमायूंपुर उत्तरी की पूर्व पार्षद रोजा खातून का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि रोजा खातून वर्ष 2001 से 2012 तक लगातार दो कार्यकाल तक समाजवादी पार्टी के बैनर तले पार्षद रहीं और क्षेत्र की जनता से उनका गहरा जुड़ाव था। उनका तीन मई को निधन हो गया था। उनके निधन के बाद यह पहली सदन बैठक थी। लेकिन शोक प्रस्ताव को एजेंडे में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने इसे बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। इस पर सदन में मौजूद पार्षदों ने तालियां बजाकर उनका समर्थन किया।

प्रशासन ने मांगी माफी, फिर भी नहीं थमा विरोध

बैठक का संचालन कर रहे अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने पूरे घटनाक्रम पर खेद व्यक्त किया। उन्होंने सदन की कार्यवाही में देरी, पार्षदों को नगर आयुक्त की विदाई की सूचना न देने और दिवंगत पार्षद के शोक प्रस्ताव को एजेंडे में शामिल न किए जाने पर माफी मांगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। हालांकि पार्षद इस जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे। कई सदस्यों ने कहा कि इतनी बड़ी चूक को सामान्य गलती नहीं माना जा सकता। हंगामे और विरोध के बीच किसी तरह परिचय की प्रक्रिया शुरू कराई गई।

शोक सभा के बाद स्थगित हुई बैठक

स्थिति सामान्य होने के बाद मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने मंच से कहा कि शोक सभा के बाद एक घंटे के अंतराल पर बैठक की कार्यवाही दोबारा शुरू की जा सकती है। हालांकि उनकी पूरी बात सुने बिना ही कुछ पार्षदों ने फिर हंगामा शुरू कर दिया। बाद में मेयर ने सभी को शांत कराया और दिवंगत पार्षद रोजा खातून की स्मृति में दो मिनट का मौन रखवाया। इसके बाद सदन की बैठक स्थगित कर दी गई। इस दौरान नगर आयुक्त अजय जैन, अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार, नवागत अपर नगर आयुक्त गौरव रंजन समेत बड़ी संख्या में पार्षद और प्रतिनिधि मौजूद रहे। मंगलवार की यह बैठक नगर निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी को खुलकर सामने ले आई।

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