स्टे ऑर्डर के बावजूद गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट सख्त: सिद्धार्थनगर पुलिस देगी पांच लाख का मुआवजा, अदालत ने माना आदेश की खुली अवहेलना

सिद्धार्थनगर|13 घंटे पहले
सिद्धार्थनगर पुलिस देगी पांच लाख का मुआवजा, अदालत ने माना आदेश की खुली अवहेलना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सिद्धार्थनगर पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा रुख अपनाया। गिरफ्तारी पर रोक के बावजूद एक युवक को जेल भेज दिया गया। हाईकोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने इटवा थाना प्रभारी संजय कुमार मिश्रा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के भी निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने इस मामले को कोर्ट के आदेश की स्पष्ट और गंभीर अवहेलना करार दिया है। जिससे न्यायिक व्यवस्था की गरिमा पर प्रश्न उठता है।

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जब किसी आरोपी की गिरफ्तारी पर अंतरिम संरक्षण आदेश प्रभावी हो, तब उसे अरेस्ट कर जेल भेजना अत्यंत गंभीर और अस्वीकार्य कृत्य है। अदालत ने टिप्पणी की कि इस प्रकार की घटनाएं कानून के शासन और न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करती हैं।

एक अप्रैल 2026 को लगाई थी रोक

यह मामला इटवा थाना क्षेत्र में दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है। जिसमें अनिल सोनी के खिलाफ बीएनएस और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। अनिल सोनी ने इस एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल की थी। इस पर अदालत ने एक अप्रैल 2026 को उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी, यानी स्टे ऑर्डर प्रभावी था।

पुलिस कार्रवाई और जेल भेजने पर सवाल

याचिका के अनुसार, इसके बावजूद इटवा पुलिस ने चार अप्रैल 2026 को अनिल सोनी को अरेस्ट कर जेल भेज दिया। परिजनों और अधिवक्ताओं ने पुलिस को कोर्ट के आदेश की जानकारी देने का प्रयास किया। उसे अनसुना कर दिया गया। यहां तक कि हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल होने के बाद भी आरोपी जेल में बंद रहा। बाद में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद 29 अप्रैल 2026 को उसे जिला जेल सिद्धार्थनगर से रिहा किया गया।

अदालत की सख्त टिप्पणी और निर्देश

हाईकोर्ट ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि या तो सरकारी अधिवक्ता अदालत के आदेश संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंचाते या पुलिस अधिकारी जानबूझकर आदेशों की अनदेखी करते हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर को आदेश की जानकारी भेजी गई थी। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। खंडपीठ ने थाना प्रभारी के आचरण को गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही राज्य सरकार को एक माह के भीतर पीड़ित को पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार चाहे तो यह राशि संबंधित थाना प्रभारी से वसूली जा सकती है।

अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थनगर को 13 जुलाई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि आदेश का पालन न होने की स्थिति में एसपी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा। इस फैसले को न्यायिक आदेशों के पालन को लेकर एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

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