कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: काउंटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति वैध, टीएमसी की याचिका खारिज

कोलकाता|01 मई 2026
काउंटिंग में केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति वैध, टीएमसी की याचिका खारिज

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया। अदालत ने टीएमसी की उस याचिका को खारिज कर दिया। जिसमें मतगणना के लिए केवल केंद्रीय कर्मचारियों की नियुक्ति पर सवाल उठाया गया था। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने साफ कहा कि इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया का फैसला पूरी तरह वैध है। कोर्ट ने माना कि चुनाव आयोग को अपने स्तर पर व्यवस्थाएं तय करने का अधिकार है।

याचिका में टीएमसी की ओर से कहा गया था कि बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना में केवल केंद्रीय कर्मियों को पर्यवेक्षक बनाया गया है। पार्टी के वकील और सांसद कल्याण बनर्जी ने अदालत में दलील दी कि अन्य राज्यों में ऐसा नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास ऐसा निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को मतदान ड्यूटी में तो लगाया गया, लेकिन मतगणना पर्यवेक्षक के रूप में उन्हें अलग कर दिया गया। इसे नियमों के खिलाफ बताया गया।

चुनाव आयोग ने दिया जवाब

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से दलील पेश की गई। आयोग के वकील ने कहा कि सभी फैसले कानून और नियमों के तहत लिए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि याचिका का मकसद मतगणना प्रक्रिया को प्रभावित करना और उसे टालना है। कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपने आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाए। इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया।

कोर्ट ने भविष्य के लिए छोड़ा रास्ता खुला

हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में मतगणना के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी या धांधली के ठोस सबूत सामने आते हैं, तो उसे चुनौती दी जा सकती है। इसके लिए चुनाव याचिका का विकल्प खुला रखा गया है। यह टिप्पणी अहम मानी जा रही है। इससे यह संकेत मिलता है कि अदालत ने पूरी प्रक्रिया को अभी वैध माना है, लेकिन भविष्य में शिकायत का रास्ता बंद नहीं किया है।

मतदान केंद्र बदलने पर भी याचिका

इसी बीच एक और याचिका भी हाईकोर्ट में दाखिल की गई है। यह याचिका मतदान केंद्रों के स्थान बदलने को लेकर है। वकील बिश्वरूप भट्टाचार्य की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया है कि अचानक केंद्र बदलना नियमों के खिलाफ है। अदालत ने इस मामले में अभी फैसला सुरक्षित रख लिया है। यानी इस पर आने वाले दिनों में निर्णय आ सकता है।

चार मई को काउंटिंग

बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में संपन्न हुआ। पहला चरण 23 अप्रैल को और दूसरा 29 अप्रैल को हुआ। अब सभी की नजर चार मई पर है, जब मतगणना होगी। इसी दिन चुनाव के नतीजे भी सामने आएंगे। इस फैसले के बाद अब काउंटिंग की प्रक्रिया को लेकर स्थिति साफ हो गई है। चुनाव आयोग अपने तय प्लान के अनुसार आगे बढ़ सकेगा।

नव्य जागरण

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