TMC में विवाद पर नरम पड़े कल्याण बनर्जी: बोले- अभिषेक मेरे बेटे जैसे, पिता का काम माफ करना, वकील बदलने के बाद बढ़ा था विवाद

कोलकाता|2 घंटे पहले
बोले- अभिषेक मेरे बेटे जैसे, पिता का काम माफ करना, वकील बदलने के बाद बढ़ा था विवाद

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर पिछले कुछ दिनों से चल रही बयानबाजी के बीच सीनियर सांसद कल्याण बनर्जी ने शनिवार को अपने तेवर नरम करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अभिषेक उनके बेटे जैसे हैं और बेटे की गलतियों को माफ करना एक पिता का कर्तव्य होता है। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही कल्याण बनर्जी ने सार्वजनिक रूप से अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की थी।

दरअसल, विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब फर्जी हस्ताक्षर से जुड़े एक मामले में अभिषेक बनर्जी ने अपना कानूनी प्रतिनिधि बदल दिया। पहले इस मामले में कल्याण बनर्जी उनके वकील थे। लेकिन बाद में अभिषेक ने दूसरे अधिवक्ता को जिम्मेदारी सौंप दी। इसके बाद कल्याण बनर्जी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि अभिषेक को वरिष्ठ नेताओं का सम्मान करना नहीं आता और उनका व्यवहार अहंकारी होता जा रहा है। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि पार्टी नेतृत्व को तय करना होगा कि वह उनके साथ है या अभिषेक के साथ। हालांकि शनिवार को उन्होंने अपने सुर बदलते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं। लेकिन व्यक्तिगत संबंधों में कोई कटुता नहीं है। उन्होंने कहा कि अभिषेक को उन्होंने बचपन से बढ़ते देखा है। परिवार के सदस्य की तरह स्नेह दिया है। ऐसे में यदि कोई गलती होती है तो उसे माफ करना भी उनका दायित्व है।

अभिषेक ने भी दिखाया संयम

विवाद के बीच अभिषेक बनर्जी ने भी संयमित प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि कल्याण बनर्जी उनसे उम्र और अनुभव में बड़े हैं और उन्हें अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है। अभिषेक ने कहा कि उन्होंने बचपन से उनका मार्गदर्शन किया है। इसलिए वह उनके खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों नेताओं के हालिया बयानों से पार्टी के भीतर तनाव कम होने के संकेत मिले हैं।

बंगाल की राजनीति और लोकतंत्र पर भी उठाए सवाल

कल्याण बनर्जी ने इस दौरान पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राज्य में लोकतांत्रिक मूल्यों पर दबाव बढ़ा है। विपक्षी दलों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक माहौल ऐसा बन गया है। जहां विरोधी विचारों को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पा रहा है। साथ ही उन्होंने तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के संभावित विलय की चर्चाओं को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने कहा कि दोनों दलों के एक होने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और संगठनात्मक संरचना के साथ आगे बढ़ रही है।

अंदरूनी खींचतान पर टिकी नजरें

राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि हाल के घटनाक्रम ने तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक संतुलन को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। हालांकि वरिष्ठ नेताओं की ओर से दिए जा रहे संतुलित बयानों के बाद यह संकेत भी मिले हैं कि पार्टी किसी बड़े टकराव से बचते हुए आंतरिक मतभेदों को संवाद के जरिए सुलझाने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की रणनीति और नेताओं के बीच तालमेल पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।

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