ईडी के सामने पेश हुए अभिषेक बनर्जी: कैश फॉर जॉब स्कैम में बड़ी कार्रवाई, फर्जी हस्ताक्षर मामले में भी जांच हुई तेज

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष पेश हुए। केंद्रीय एजेंसी उनसे चर्चित कैश फॉर स्कूल जॉब स्कैम मामले में पूछताछ कर रही है। ईडी ने उन्हें तीन जून को नोटिस जारी कर 15 जून को दोपहर 12 बजे तक उपस्थित होने का निर्देश दिया था। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और ईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट में भी उनका नाम शामिल किया गया है। ऐसे में उनकी पेशी को राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कैश फॉर जॉब स्कैम की जांच के साथ-साथ अभिषेक बनर्जी एक अन्य मामले में भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। रविवार को पश्चिम बंगाल सीआईडी ने विधायकों के कथित फर्जी हस्ताक्षर प्रकरण में उनसे करीब आठ घंटे तक पूछताछ की थी। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी ने उनसे कई दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े सवाल पूछे। इस मामले में उन्हें एक बार फिर 16 जून को सीआईडी के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा गया है।
कालीघाट स्थित आवास पर देर रात छापेमारी
इस बीच 13 जून की देर रात कोलकाता पुलिस ने अभिषेक बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर तलाशी अभियान चलाया। पुलिस अधिकारियों की एक टीम केंद्रीय बलों के जवानों के साथ रात करीब तीन बजे उनके घर पहुंची। तलाशी अभियान लगभग चार घंटे तक चला। पुलिस सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई अभिषेक के निजी सहायक सुमित रॉय की तलाश में की गई थी। छापेमारी की सूचना मिलते ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी कुछ समय के लिए अभिषेक के आवास पहुंचीं। हालांकि उन्होंने इस संबंध में सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की।
अभिषेक ने उठाए कार्रवाई पर सवाल
छापेमारी के बाद अभिषेक बनर्जी ने जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह हमेशा जांच में सहयोग करते रहे हैं। कभी भी किसी एजेंसी के समन से नहीं बचे। उनका कहना था कि यदि उन्हें नोटिस देना था तो कानून के अनुसार घर पर मौजूद किसी व्यक्ति को भी नोटिस सौंपा जा सकता था। उन्होंने एजेंसियों से प्रक्रिया का पालन करने की बात कही।
ममता बनर्जी के खिलाफ भी दर्ज हुई एफआईआर
राज्य की राजनीति में हलचल के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भी कोलकाता के हेयर स्ट्रीट थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए एक भाषण से सांप्रदायिक सौहार्द और लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी। हालांकि इस मामले में अभी जांच जारी है और किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है। राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रमों के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जबकि विभिन्न जांच एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर मामलों की पड़ताल में जुटी हुई हैं।
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