पांच राज्यों के चुनाव नतीजे: बंगाल में भाजपा का ऐतिहासिक कब्जा, तमिलनाडु में नया चेहरा, असम-पुडुचेरी में एनडीए की वापसी

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों ने देश की राजनीति का समीकरण बदल दिया है। वेस्ट बंगाल, तमिलनाडु और केरलम में सत्ता परिवर्तन हुआ है। वहीं असम और पुडुचेरी में एनडीए ने अपनी पकड़ बनाए रखी। सबसे बड़ा उलटफेर बंगाल में देखने को मिला, जहां भाजपा ने पहली बार सरकार बनाई। वहीं तमिलनाडु में दशकों पुरानी राजनीति टूट गई।
बंगाल में भाजपा ने इतिहास रच दिया। पार्टी 3 सीटों से बढ़कर 206 सीटों तक पहुंच गई। उसने टीएमसी को करारी शिकस्त दी। ममता बनर्जी खुद चुनाव हार गईं। उनके साथ 12 मंत्री भी हार गए। भाजपा का स्ट्राइक रेट करीब 70% रहा। अब सवाल यह है कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा। संभावित नामों में सुवेंदु अधिकारी, सुकांत मजूमदार और दिलीप घोष शामिल हैं। पार्टी महिला चेहरे पर भी दांव खेल सकती है।
तमिलनाडु में टूटा 59 साल का ट्रेंड
तमिलनाडु में बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ। टीवीके ने सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। विजय की पार्टी पहली बार सत्ता में आने जा रही है। 1967 के बाद पहली बार ऐसा होगा कि न डीएमके और न एआईडीएमके सरकार में होगी। एम.के. स्टालिन भी चुनाव हार गए। टीवीके ने 108 सीटें जीतकर 46% स्ट्राइक रेट हासिल किया।
असम में बीजेपी की लगातार तीसरी जीत
असम में भाजपा ने अपनी पकड़ और मजबूत की। हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में पार्टी ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। भाजपा ने 82 सीटें जीतकर बहुमत से आगे निकल गई। खास बात यह रही कि कोई भी मंत्री चुनाव नहीं हारा। पार्टी का स्ट्राइक रेट 92% से ज्यादा रहा। कांग्रेस यहां सिर्फ 19 सीटों तक सिमट गई।
केरलम में कांग्रेस की वापसी
केरलम में 10 साल बाद कांग्रेस ने वापसी की। कांग्रेस ने 63 सीटें जीतकर सरकार बनाने का रास्ता साफ किया। सीएम पिनाराई विजयन अपनी सीट जीत गए, लेकिन उनकी सरकार हार गई। इसके साथ ही देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि कहीं भी लेफ्ट सरकार नहीं बची। अब मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार सामने हैं, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है।
पुडुचेरी में रंगासामी की वापसी
एन. रंगासामी एक बार फिर सत्ता में लौटे हैं। उनकी पार्टी एआईएनआरसी ने 12 सीटें जीतकर सरकार बनाई। भाजपा ने भी 4 सीटों के साथ अच्छा प्रदर्शन किया। कांग्रेस यहां सिर्फ एक सीट पर सिमट गई। एआईएनआरसी का स्ट्राइक रेट 75% रहा, जो सबसे ज्यादा है।
रणनीति और वोटिंग पैटर्न का असर
इन चुनावों में रणनीति ने बड़ा रोल निभाया। भाजपा ने बंगाल में ‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल अपनाया। अमित शाह ने खुद 15 दिन तक कैंपेन किया। वहीं वोटर लिस्ट में बदलाव और क्षेत्रीय समीकरणों का भी असर पड़ा। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय मुद्दों और नेतृत्व ने चुनाव का रुख तय किया।
राजनीति में नए संकेत
इन नतीजों से साफ है कि देश की राजनीति तेजी से बदल रही है। नए चेहरे उभर रहे हैं। पुराने समीकरण टूट रहे हैं। मतदाता अब बदलाव के लिए तैयार दिख रहा है। आने वाले समय में यह बदलाव और तेज हो सकता है।
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