बंगाल एसआईआर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: अभी दखल से इनकार, नाम कटे वोटर नहीं डाल पाएंगे वोट

कोलकाता|26 अप्रैल 2026
अभी दखल से इनकार, नाम कटे वोटर नहीं डाल पाएंगे वोट

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि इस स्टेज पर चुनाव प्रक्रिया में दखल नहीं दिया जाएगा। कोर्ट ने उन मतदाताओं को वोट डालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिनके नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में काटे गए हैं और जिनकी अपील अभी लंबित है। बेंच ने कहा कि अगर ऐसे वोटरों को अनुमति दी गई तो इससे उन लोगों के अधिकार प्रभावित होंगे जिनके नाम वैध रूप से सूची में हैं। इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव से महज 10 दिन पहले हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर हर स्टेज पर आपत्तियां आती रहेंगी, तो चुनाव कराना मुश्किल हो जाएगा। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करेगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल SIR प्रक्रिया जारी रहेगी और अपीलों पर तय नियमों के अनुसार सुनवाई होगी।

लाखों अपीलें लंबित

सुनवाई के दौरान कोलकाता हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 11 अप्रैल तक 34 लाख से ज्यादा अपीलें दायर हो चुकी हैं। इन सभी मामलों में अभी फैसला आना बाकी है। इतनी बड़ी संख्या में लंबित मामलों के कारण स्थिति जटिल बनी हुई है। कोर्ट ने माना कि यह चुनौतीपूर्ण स्थिति है लेकिन चुनाव प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता।

‘जरूरत पड़ी तो नतीजों में दखल देंगे’

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में स्थिति गंभीर होने पर हस्तक्षेप किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि अगर बड़ी संख्या में मतदाता वोट डालने से वंचित रह जाते हैं और यह संख्या चुनाव के नतीजों को प्रभावित करती है, तो वह मामले को देखेगा। जस्टिस बागची ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर जीत का अंतर 2% है और 15% वोटर वोट नहीं डाल सके, तो यह चिंता का विषय होगा। ऐसे में न्यायिक हस्तक्षेप संभव है।

एसआईआर प्रक्रिया में गलतियों की संभावना

कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी अहम टिप्पणी की। जस्टिस बागची ने कहा कि जांच कर रहे अधिकारियों से 100% सटीकता की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने बताया कि अधिकारी भारी दबाव में काम कर रहे हैं। रोजाना हजारों दस्तावेजों की जांच करनी पड़ती है। ऐसे में कुछ गलतियां होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि 70% सटीकता भी इस स्थिति में अच्छा प्रदर्शन माना जा सकता है। इसी कारण एक मजबूत अपीलीय तंत्र जरूरी है, ताकि गलतियों को सुधारा जा सके।

बंगाल में वोटरों की संख्या में बड़ी गिरावट

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के बाद बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाए गए हैं। अक्टूबर 2025 में राज्य में कुल 7.66 करोड़ वोटर थे। अब यह संख्या घटकर करीब 6.76 करोड़ रह गई है। यानी लगभग 11.85% वोटर सूची से बाहर हो गए हैं। जांच के दायरे में आए 60.06 लाख वोटरों में से 27.16 लाख के नाम हटाए गए हैं। यह आंकड़े चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना रहे हैं।

बॉर्डर जिलों में ज्यादा असर

सबसे ज्यादा असर बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में देखने को मिला है। नॉर्थ 24 परगना जैसे जिलों में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं। यहां 5.91 लाख में से 3.25 लाख नाम हटे। अन्य क्षेत्रों में भी लाखों वोटर सूची से बाहर किए गए हैं। इससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।

नव्य जागरण

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