राजस्थान में बस-ट्रेलर की टक्कर के बाद लगी आग: 8 यात्रियों की मौत; 21 यात्री घायल, डिक्की में सिगरेट के बॉक्स होने का दावा

राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर एक दर्दनाक सड़क हादसे ने आठ लोगों की जान ले ली। ऋषिकेश से इंदौर जा रही स्लीपर बस आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गई। इसके बाद दोनों वाहनों में भीषण आग लग गई। हादसे में छह लोगों की जिंदा जलने से जबकि दो की गंभीर सिर की चोट के कारण मौत हो गई। घटना में 21 यात्री घायल हुए हैं। इनका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है।
यह हादसा कोलवा थाना क्षेत्र के तनावड़ स्थित जीरो पॉइंट पर हुआ। पुलिस के अनुसार, ऋषिकेश से इंदौर जा रही हंस ट्रेवल्स की स्लीपर बस आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों वाहनों में तुरंत आग लग गई और देखते ही देखते लपटों ने पूरी बस को अपनी चपेट में ले लिया। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने आशंका जताई है कि बस चालक को झपकी आने के कारण यह दुर्घटना हुई। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है।
एक घंटे तक राहत नहीं
हादसे के समय बस में सवार यात्रियों के अनुसार टक्कर के तुरंत बाद आग फैल गई। लेकिन काफी देर तक कोई राहत दल मौके पर नहीं पहुंचा। जानकारों का कहना है कि करीब एक घंटे तक घायल और फंसे यात्री मदद का इंतजार करते रहे। स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर राहत कार्य शुरू किया। ग्रामीणों ने बताया कि आग में फंसे लोगों की चीख-पुकार दूर तक सुनाई दे रही थी। सूचना मिलने के बाद पुलिस, एंबुलेंस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने आग पर काबू पाने के बाद यात्रियों को बाहर निकाला गया।
नौ घायलों की हो सकी है पहचान
राहत कार्य में शामिल एक ग्रामीण ने दावा किया कि बस की डिक्की में सिगरेट के पैकेटों से भरे कई बॉक्स रखे हुए थे। उसका कहना है कि इन्हीं के कारण आग ने तेजी से विकराल रूप लिया। हालांकि पुलिस ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है और पूरे मामले की जांच जारी है। पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित ने बताया कि हादसे में छह लोगों की मौत आग में झुलसने तथा दो की सिर में गंभीर चोट लगने से हुई है। 21 घायलों को दौसा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं, अब तक केवल नौ घायलों की पहचान हो सकी है। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे की सूचना करीब 3:20 बजे दिए जाने के बावजूद फायर ब्रिगेड और अन्य राहत दलों को मौके पर पहुंचने में देरी हुई। इसके कारण बचाव कार्य प्रभावित हुआ।
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