'ऑपरेशन सिंदूर' का दिखा दम: ब्रह्मोस-आकाश की वैश्विक मांग बढ़ी, 21,000 करोड़ रुपये के रक्षा सौदों में तेजी

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय रक्षा प्रणालियों के प्रभावी प्रदर्शन के बाद वैश्विक रक्षा बाजार में स्वदेशी हथियारों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, लॉयटरिंग म्युनिशन और नेत्र जैसे अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म अब कई देशों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, विभिन्न देशों के साथ 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के रक्षा सौदे हो चुके हैं या अंतिम चरण में हैं। भारतीय सैन्य तकनीक की बढ़ती विश्वसनीयता ने देश को वैश्विक रक्षा निर्यातक के रूप में नई पहचान दिलाई है।
रक्षा क्षेत्र के सूत्रों के अनुसार, ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम को लेकर फिलीपींस, वियतनाम समेत कई देशों ने रुचि दिखाई है। इन देशों के साथ लगभग 12,500 करोड़ रुपये के सौदे किए जा चुके हैं। वहीं, इंडोनेशिया के साथ करीब 3,600 करोड़ रुपये की डील अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में है। दूसरी ओर, स्वदेशी आकाश मिसाइल प्रणाली के लिए अर्मेनिया के साथ 6,100 करोड़ रुपये का अनुबंध पहले ही संपन्न हो चुका है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इन प्रणालियों की परिचालन क्षमता और सटीकता ने इंटरनेशनल लेवल पर भारत की रक्षा तकनीक को नई विश्वसनीयता प्रदान की है।
रक्षा निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि
रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 62 प्रतिशत अधिक है। भारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण, सैन्य प्रणालियां और कलपुर्जे निर्यात कर रहा है। अमेरिका, फ्रांस और अर्मेनिया जैसे देश भारतीय रक्षा उत्पादों के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं। अमेरिका को बोइंग और लॉकहीड मार्टिन जैसी कंपनियों के लिए बड़ी मात्रा में रक्षा उपकरण और कंपोनेंट्स की आपूर्ति की जा रही है।
50 हजार करोड़ के लक्ष्य की ओर बढ़ता भारत
सरकार ने वर्ष 2029-30 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। गौरतलब है कि वर्ष 2016-17 में भारत का रक्षा निर्यात मात्र 1,522 करोड़ रुपये था। एक दशक से भी कम समय में इसमें 25 गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय हथियारों को मिली वैश्विक पहचान इस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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