राजौरी के जंगलों में लगी भीषण आग: 4 महीने में 45वीं बार भड़की चिंगारी, हाई अलर्ट पर वन विभाग

10 जून 2026
4 महीने में 45वीं बार भड़की चिंगारी, हाई अलर्ट पर वन विभाग

जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। बुधवार को जिले के कई वन क्षेत्रों में भीषण आग भड़कने से वन विभाग और प्रशासन की चिंता बढ़ गई। अधिकारियों के अनुसार, अत्यधिक गर्मी, लंबे समय से जारी शुष्क मौसम और लू जैसी परिस्थितियों के कारण आग तेजी से फैल रही है। आग लगने की ताजा घटनाओं के बाद वन विभाग की टीमें, स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवक राहत एवं नियंत्रण कार्यों में जुटे हुए हैं। कई स्थानों पर आग ने वन क्षेत्र के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। जिससे पर्यावरण और वन्यजीवों पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पिछले लगभग 12 सप्ताह के दौरान राजौरी जिले में जंगलों में आग लगने की करीब 45 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें राजौरी और नौशेरा वन मंडल दोनों शामिल हैं। हाल ही में कालाकोट तहसील के सियालसुई खादर वन क्षेत्र में भी आग ने बड़े इलाके को प्रभावित किया था। वन संरक्षक (पश्चिम सर्कल) सत पाल ने बताया कि लगातार गर्म और शुष्क मौसम के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। हालांकि हाल के दिनों में हुई हल्की बारिश के बाद तापमान में कुछ गिरावट आई है, जिससे आने वाले समय में आग की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

वन्यजीवों और जैव विविधता पर खतरा

वन अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश घटनाएं सतही आग की हैं, जो पेड़ों की ऊपरी शाखाओं तक नहीं पहुंच रही हैं। इसके बावजूद इनसे जंगलों की जैव विविधता को व्यापक नुकसान हो रहा है। आग के कारण बायोमास, छोटे जीव-जंतु, पक्षी, सरीसृप और अन्य वन्य प्रजातियां प्रभावित हो रही हैं। विभाग ने आग के शुरुआती फैलाव को रोकने के लिए संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने और संचार तंत्र को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं। इसके लिए अधिकारियों की विशेष बैठक भी आयोजित की गई है।

जनता से सहयोग की अपील

वन विभाग ने स्थानीय लोगों से जंगलों में आग की घटनाओं को रोकने में सहयोग करने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि नागरिक लापरवाही से बचें और आग लगने की किसी भी घटना की सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दें। विभाग का मानना है कि सामूहिक प्रयासों से ही जंगलों और प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखा जा सकता है। फिलहाल वन विभाग, वन सुरक्षा बल, सामाजिक वानिकी विभाग और स्थानीय स्वयंसेवकों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी और राहत कार्यों में जुटी हुई हैं।

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