शिंदे गुट में बढ़ी सांसदों की संख्या: रामदास कदम बोले- उद्धव गुट के 7वें सांसद ने किया था संपर्क, मंत्री पद पर नहीं बनी बात

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना के भीतर जारी सियासी खींचतान के बीच एकनाथ शिंदे गुट के सीनियर लीडर रामदास कदम ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों के अलावा एक और सांसद भी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होना चाहते थे। उस सांसद ने शामिल होने के लिए आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कर दिए थे। लेकिन बाद में कैबिनेट मंत्री पद की मांग रखी। जब यह मांग स्वीकार नहीं की गई तो उन्होंने अपना फैसला बदल लिया।
रामदास कदम ने कहा कि संबंधित सांसद का नाम सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। लेकिन इतना जरूर कहा कि वह सांसद उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी माने जाते हैं। उन्होंने संकेत देते हुए कहा कि वह नेता अक्सर उद्धव ठाकरे के बगल में बैठते हैं। कदम के इस बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नए कयास शुरू हो गए हैं।
छह सांसदों के शामिल होने से मजबूत हुआ शिंदे गुट
शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसदों ने आधिकारिक रूप से एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थाम लिया। इन सांसदों ने अपनी नई राजनीतिक पारी का ऐलान किया। इस घटनाक्रम के बाद लोकसभा में शिंदे गुट के सांसदों की संख्या सात से बढ़कर 13 हो गई है। इससे पार्टी की संसदीय ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने इस मौके पर कहा कि वर्ष 2022 में उन्होंने पार्टी और चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ को बचाने के लिए विद्रोह किया था। उस समय उनके साथ 40 विधायक थे। अब सांसदों के स्तर पर भी पार्टी को बड़ी मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई बालासाहेब ठाकरे के विचारों और मूल शिवसेना की विरासत को बचाने के लिए है। शिंदे ने कहा कि आज शामिल हुए छह सांसदों ने भी इसी विचारधारा के साथ कदम बढ़ाया है।
उद्धव ठाकरे के सामने बढ़ी नई चुनौती
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए यह घटनाक्रम बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। वर्ष 2022 में विधायकों की बगावत के बाद यह दूसरी बड़ी टूट है। इसने पार्टी की संगठनात्मक और संसदीय ताकत को प्रभावित किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रहे दलबदल से उद्धव गुट के सामने अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इसी बीच विधानसभा के मानसून सत्र को लेकर उद्धव ठाकरे ने अपने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठक बुलाई थी। हालांकि, इस बैठक में तीन विधायक और एक एमएलसी अनुपस्थित रहे। इनमें विधायक सुनील शिंदे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सफाई देते हुए कहा कि वह निजी कार्यों के कारण अपने गांव में थे। इसी वजह से बैठक में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने अपने बारे में चल रही राजनीतिक अटकलों को निराधार बताया।
लोकसभा और विधानसभा चुनावों के आंकड़े
महाराष्ट्र की 288 सदस्यीय विधानसभा के 2024 चुनाव में भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी वाले महायुति गठबंधन ने 235 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, महाविकास अघाड़ी को 50 सीटों से संतोष करना पड़ा। उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) केवल 20 सीटें जीत सकी थी। लोकसभा चुनाव 2024 में भी महाराष्ट्र की 48 सीटों में विपक्षी इंडिया गठबंधन के नेतृत्व वाले महाविकास अघाड़ी ने 30 सीटों पर जीत हासिल की थी। इनमें उद्धव ठाकरे गुट को नौ सीटें मिली थीं। वहीं, एनडीए गठबंधन को 17 सीटों पर सफलता मिली थी।
शिवसेना में बगावत का पुराना इतिहास
शिवसेना के इतिहास में यह पहली बार नहीं है जब पार्टी को बड़े स्तर पर बगावत का सामना करना पड़ा हो। वर्ष 1991 में बालासाहेब ठाकरे के नेतृत्व के दौरान छगन भुजबल ने 14 विधायकों के साथ पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। बाद में वर्ष 1999 में वह शरद पवार के साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में चले गए। हाल के वर्षों में एनसीपी में हुई टूट के बाद भुजबल अजित पवार गुट के साथ जुड़ गए। मौजूदा घटनाक्रम को भी शिवसेना के इतिहास की बड़ी राजनीतिक उठापटक के रूप में देखा जा रहा है।
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