रिलायंस पर ब्रोकरेज हाउसेज का बढ़ा भरोसा: जियो IPO और न्यू एनर्जी बने ग्रोथ ट्रिगर, खुलेगा वैल्यू अनलॉकिंग का रास्ता

रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं वार्षिक आम बैठक के बाद देश और दुनिया की कई प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों ने कंपनी के भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख जताया है। AGM में सामने आए रोडमैप, जियो इन्फोकॉम के प्रस्तावित IPO और न्यू एनर्जी से जुड़े निवेश योजनाओं को बाजार ने उत्साहजनक संकेत माना है। सोमवार को रिलायंस का शेयर कारोबार के दौरान दो प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ करीब 1,345 रुपये के स्तर तक पहुंच गया।
ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि जियो इन्फोकॉम की लिस्टिंग रिलायंस के डिजिटल कारोबार की वास्तविक वैल्यू को सामने लाएगी। इससे उन निवेशकों को भी अवसर मिलेगा जो विशेष रूप से टेलीकॉम और डिजिटल सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं। फर्म ने शेयर पर 'बाय' रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,640 रुपये का लक्ष्य मूल्य निर्धारित किया है।
AI और डिजिटल बिजनेस बनेगा ग्रोथ इंजन
ब्रोकरेज रिपोर्टों के अनुसार रिलायंस का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ‘रिलायंस इंटेलिजेंस’ अब योजना चरण से निकलकर क्रियान्वयन के दौर में प्रवेश कर चुका है। जामनगर में विकसित हो रहा एआई हब कंपनी के लिए दीर्घकालिक विकास का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। मोतीलाल ओसवाल का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में रिलायंस के कुल अतिरिक्त EBITDA में लगभग 80 प्रतिशत योगदान डिजिटल कारोबार का होगा।
न्यू एनर्जी परियोजनाओं पर बड़ा दांव
एमके ग्लोबल और एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने रिलायंस की न्यू एनर्जी रणनीति को भविष्य का सबसे बड़ा ग्रोथ ट्रिगर बताया है। दहेज में पीटीए प्रोजेक्ट, नागोथने में पीवीसी प्लांट, 10 गीगावाट इंटीग्रेटेड सोलर प्रोजेक्ट और 40 गीगावाट बैटरी निर्माण क्षमता को कंपनी की दीर्घकालिक मजबूती से जोड़ा गया है। इसके अलावा कच्छ में प्रस्तावित सोलर, बैटरी और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं से भी बड़े अवसर बनने की उम्मीद जताई गई है।
पांच वर्षों में EBITDA दोगुना करने का लक्ष्य
ब्रोकरेज हाउसेज का कहना है कि रिलायंस ने अगले पांच वर्षों में अपने समेकित EBITDA को दोगुना से अधिक करने का लक्ष्य रखा है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2031 तक यह आंकड़ा 4.2 से 4.5 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच सकता है। साथ ही कैपेक्स में क्रमिक कमी और मजबूत फ्री कैश फ्लो से कंपनी की बैलेंस शीट और मजबूत होगी। नुवामा समेत कई विश्लेषकों का मानना है कि जियो IPO, डिजिटल विस्तार, न्यू एनर्जी कारोबार और एआई आधारित निवेश आने वाले वर्षों में रिलायंस के लिए नए विकास इंजन साबित हो सकते हैं। हालांकि वैश्विक मांग में कमजोरी और रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव जैसे जोखिमों पर भी नजर बनाए रखने की जरूरत होगी।
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