NSE ने IPO के लिए दाखिल किया DRHP: 30 हजार करोड़ का देश का सबसे बड़ा IPO, 10 साल बाद खुला लिस्टिंग का रास्ता

देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल कर दिया है। करीब एक दशक से लंबित इस लिस्टिंग प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ ही भारतीय पूंजी बाजार में उत्साह का माहौल है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह आईपीओ लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का हो सकता है। जो सफल होने पर देश का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू साबित होगा।
NSE का प्रस्तावित आईपीओ पूरी तरह ऑफर फॉर सेल आधारित होगा। इसका अर्थ है कि कंपनी कोई नए शेयर जारी कर पूंजी नहीं जुटाएगी। मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बाजार में बेचेंगे। ड्राफ्ट दस्तावेजों के अनुसार, एक्सचेंज के निवेशक कुल लगभग छह प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेंगे। खास बात यह है कि देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी, जो NSE की प्रमुख शेयरधारकों में शामिल है। इस इश्यू में अपने शेयरों की बिक्री नहीं करेगी। अनलिस्टेड मार्केट में NSE की अनुमानित वैल्यूएशन करीब पांच लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इसी आधार पर बाजार विश्लेषकों ने आईपीओ का आकार 30 हजार करोड़ रुपये के आसपास रहने का अनुमान जताया है। यदि ऐसा होता है तो यह 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के 27 हजार करोड़ रुपये के आईपीओ को पीछे छोड़ देगा।
SBI बनेगा सबसे बड़ा विक्रेता
ड्राफ्ट पेपर्स के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक इस आईपीओ में सबसे बड़ा विक्रेता होगा। बैंक करीब 2.47 करोड़ शेयर बाजार में उतारेगा। इसके अलावा मॉरीशस स्थित एमएस स्ट्रेटेजिक लिमिटेड, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड सहित कई घरेलू और विदेशी निवेशक भी अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे। आईपीओ के बाद NSE के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध किए जाएंगे।
2016 में लिस्टिंग की बनाई थी योजना
NSE ने पहली बार वर्ष 2016 में अपनी लिस्टिंग की योजना बनाई थी। लेकिन को-लोकेशन विवाद और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े सवालों के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। SEBI ने उस समय एक्सचेंज को अपना प्रस्ताव वापस लेने की सलाह दी थी। इसके बाद NSE ने अपने प्रशासनिक ढांचे, अनुपालन प्रणाली और निगरानी तंत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए। जनवरी 2026 में SEBI से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट मिलने के बाद लिस्टिंग प्रक्रिया को नई गति मिली। इसके बाद फरवरी में NSE बोर्ड ने आईपीओ प्रस्ताव को मंजूरी दी। हाल ही में आईपीओ समिति ने अंतिम दस्तावेजों पर मुहर लगाई।
को-लोकेशन विवाद का समाधान अभी बाकी
लंबे समय से चर्चा में रहे को-लोकेशन मामले को सुलझाने के लिए NSE ने 1,387 करोड़ रुपये से अधिक की सेटलमेंट राशि देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार SEBI की उच्च स्तरीय सलाहकार समिति ने लगभग 1,880 करोड़ रुपये के सेटलमेंट की सिफारिश की है। यह मामला अभी नियामकीय विचाराधीन है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि NSE का आईपीओ भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। निवेशकों की निगाहें अब SEBI की अंतिम मंजूरी और इश्यू की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई हैं। क्योंकि यह लिस्टिंग भारतीय शेयर बाजार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की क्षमता रखती है।
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