मदरसा ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट सख्त: डीएम और कमिश्नर का आदेश रद्द, कमेटी ने बिना पर्याप्त नोटिस कार्रवाई का लगाया था आरोप

बस्ती|15 मई 2026
डीएम और कमिश्नर का आदेश रद्द, कमेटी ने बिना पर्याप्त नोटिस कार्रवाई का लगाया था आरोप

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संतकबीरनगर प्रशासन को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने ब्रिटिश मौलाना शमशुल हुदा खान के मदरसे पर हुई बुलडोजर कार्रवाई को अवैध करार दिया है। हाईकोर्ट ने बस्ती मंडलायुक्त और संतकबीरनगर डीएम के ध्वस्तीकरण आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने साफ कहा कि दोनों अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अफसरों ने मनमाने तरीके से फैसला लिया था।

हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को जारी उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसमें मदरसे की जमीन को स्टेट लैंड घोषित किया गया था। अदालत ने बस्ती मंडलायुक्त की निगरानी अपील खारिज करने वाले आदेश को भी अवैध माना। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान अधिकारियों के रवैये पर नाराजगी जताई। साथ ही पूरी कार्रवाई को कानून के खिलाफ बताया।

मदरसा कमेटी ने दाखिल की थी याचिका

मामले में मदरसा कमेटी की तरफ से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। कमेटी ने आरोप लगाया था कि प्रशासन ने बिना पर्याप्त नोटिस कार्रवाई शुरू कर दी। याचिका में कहा गया कि ध्वस्तीकरण प्रक्रिया नियमों के खिलाफ थी। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि प्रक्रिया का पालन किए बिना इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं की जा सकती। मदरसा कमेटी अब प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रही है। साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग उठाई गई है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।

13 घंटे तक चली थी बुलडोजर कार्रवाई

प्रशासन ने 25 अप्रैल को मदरसे पर बुलडोजर कार्रवाई शुरू की थी। कार्रवाई करीब 13 घंटे तक लगातार चली थी। इस दौरान चारदीवारी और कई पिलर तोड़ दिए गए थे। मदरसे का पिछला हिस्सा भी काफी हद तक ढहा दिया गया था। कमरों की आगे और पीछे की दीवारों को भी नुकसान पहुंचा था। अगले दिन 26 अप्रैल को प्रशासन फिर मौके पर पहुंचा था। आगे के हिस्से को गिराने के लिए दो पोकलेन मशीनें लगाई गई थीं। पांच बुलडोजर भी कार्रवाई में लगाए गए थे। हालांकि थोड़ी देर बाद एक पोकलेन मशीन खराब हो गई थी। इसके बाद करीब एक घंटे तक कार्रवाई जारी रही। लेकिन मजबूत पिलरों को पूरी तरह नहीं तोड़ा जा सका। बाद में प्रशासन ने कार्रवाई रोक दी थी।

भारी पुलिस फोर्स रही थी तैनात

कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मौके पर करीब 100 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। इनमें 30 महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। PAC की दो कंपनियों को भी मौके पर लगाया गया था। प्रशासन किसी तरह की अव्यवस्था नहीं चाहता था। इसी बीच 27 अप्रैल को हाईकोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप किया था। अदालत ने मदरसे पर आगे की कार्रवाई रोकने का आदेश दिया था। इसके बाद प्रशासन को ध्वस्तीकरण अभियान रोकना पड़ा था।

सरकारी जमीन और विदेशी फंडिंग के आरोप

प्रशासन का दावा था कि मदरसा सरकारी जमीन पर बना था। अधिकारियों के मुताबिक, करीब आठ साल पहले निर्माण कराया गया था। यह निर्माण लगभग 640 वर्गमीटर जमीन पर हुआ था। मदरसा तीन मंजिला बताया गया था। इसमें करीब 25 कमरे मौजूद थे। प्रशासन ने इसकी लागत लगभग पांच करोड़ रुपए बताई थी। अधिकारियों ने विदेशी फंडिंग के जरिए निर्माण होने का आरोप लगाया था। बताया गया कि मदरसा 2024 से बंद पड़ा है। बंद होने से पहले यहां करीब 400 बच्चे पढ़ते थे। प्रशासन का कहना था कि अवैध निर्माण की शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू हुई थी।

ब्रिटेन में रह रहा है मौलाना शमशुल हुदा खान

प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक, शमशुल हुदा खान फिलहाल ब्रिटेन में रह रहा है। उसने ब्रिटिश नागरिकता ले रखी है। हालांकि उसका परिवार अभी खलीलाबाद में रहता है। उसकी पत्नी, बेटा और बहू स्थानीय इलाके में मौजूद हैं। जानकारी के अनुसार, मौलाना 2017 में देश छोड़कर चला गया था। इसके बावजूद वह लंबे समय तक आजमगढ़ के एक मदरसे से वेतन लेता रहा। बाद में अधिकारियों की मिलीभगत से वीआरएस लेने का मामला भी सामने आया था। करीब पांच महीने पहले यह मामला उजागर हुआ था। इसके बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित किया गया था।

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