गोरखपुर डीडीयू यूनिवर्सिटी के गेट पर भारी हंगामा: एलएलबी प्रवेश परीक्षा में निष्कासित छात्र को रोका, पहले ही निरस्त किया गया था आवेदन

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी में रविवार को एलएलबी प्रवेश परीक्षा के दौरान उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब यूनिवर्सिटी से निष्कासित छात्र परीक्षा देने पहुंच गया। सुरक्षा कर्मियों ने उसे मुख्य प्रवेश द्वार पर ही रोक दिया। इसके बाद छात्र ने विरोध जताया और परिसर में प्रवेश करने का प्रयास किया। कुछ देर तक गेट पर बहस और नोकझोंक होती रही, हालांकि सुरक्षा कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित रखा और परीक्षा निर्धारित समय पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
रविवार दोपहर 12 बजे आयोजित एलएलबी प्रवेश परीक्षा से पहले यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सतीश प्रजापति को ईमेल के माध्यम से सूचित कर दिया था कि उनका आवेदन और प्रवेश पत्र दोनों निरस्त किए जा चुके हैं। इसके बावजूद वह परीक्षा देने यूनिवर्सिटी पहुंच गए। दस्तावेजों की जांच के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें प्रवेश से रोक दिया। इसके बाद उन्होंने विरोध शुरू कर दिया।
2024 के निष्कासन आदेश का दिया हवाला
यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुसार 17 अक्टूबर 2024 को नियंत्रक एवं विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश पर सतीश प्रजापति को यूनिवर्सिटी से निष्कासित किया गया था। उसी आदेश के तहत यूनिवर्सिटी परिसर और छात्रावास में उनके प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। प्रशासन का कहना है कि यह आदेश अब तक प्रभावी है और वापस नहीं लिया गया है।
प्रवेश प्रकोष्ठ को भी भेजा गया था पत्र
यूनिवर्सिटी के मुताबिक सात जुलाई 2026 को नियंत्रक एवं विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने प्रवेश प्रकोष्ठ को दोबारा पत्र भेजकर निष्कासन आदेश के प्रभावी होने की जानकारी दी थी। इसके बाद कुलपति के निर्देश पर 12 जुलाई को होने वाली एलएलबी प्रवेश परीक्षा के लिए छात्र का आवेदन और एडमिट कार्ड निरस्त कर दिया गया।
दोनों पक्षों ने रखी अपनी बात
छात्र का आरोप है कि उसे परीक्षा में शामिल होने से अनुचित तरीके से रोका गया और अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया। छात्र सतीश प्रजापति ने कहा कि यह मेरा एडमिट कार्ड है, लेकिन यूनिवर्सिटी के अधिकारी कह रहे हैं कि मुझे वर्ष 2024 में निष्कासित कर दिया गया था। यदि मैं 2024 से निष्कासित हूं, तो 20 अगस्त 2025 को एमए में मेरा प्रवेश किसने लिया? 3,919 रुपये की मेरी फीस किसने ली? कुलपति ने ली, प्रॉक्टर ने ली, शासन ने ली या प्रशासन ने ली? आखिर मेरी फीस किसने ली और मेरा एडमिशन किसने किया? उन्होंने आगे कहा कि मेरे साथ अन्याय हुआ है। यह मेरे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। मैं इस मामले में न्याय के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ूंगा। वहीं यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई पूर्व में जारी निष्कासन आदेश और यूनिवर्सिटी के नियमों के अनुरूप की गई। छात्र को समय रहते ईमेल के माध्यम से जानकारी भी दे दी गई थी। इसके बावजूद परीक्षा केंद्र पहुंचकर प्रवेश का प्रयास करने पर सुरक्षा कर्मियों ने नियमानुसार उसे रोक दिया।
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