मण्णपुरम फाइनेंस में गोल्ड लोन घोटाले का आरोप: 67 ग्राम सोना दूसरे के नाम रिलीज, कोर्ट के आदेश पर तीन के खिलाफ केस दर्ज

गोरखपुर|2 घंटे पहले
67 ग्राम सोना दूसरे के नाम रिलीज, कोर्ट के आदेश पर तीन के खिलाफ केस दर्ज

शहर में गोल्ड लोन के नाम पर कथित धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि मण्णपुरम फाइनेंस लिमिटेड की रेती रोड शाखा में गिरवी रखे गए 67.500 ग्राम सोने को फर्जीवाड़े के जरिए किसी अन्य व्यक्ति के नाम रिलीज कर दिया गया। पीड़ित महिला की शिकायत पर आंतरिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर मामला कोर्ट पहुंचा। अब कोर्ट के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक सहित तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

एम्स थाना क्षेत्र के गायत्री नगर वार्ड संख्या-20 स्थित झरना टोला निवासी तारा शर्मा ने आरोप लगाया है कि कोरोना महामारी के दौरान आर्थिक आवश्यकता के चलते उन्होंने रेती रोड स्थित मण्णपुरम फाइनेंस शाखा में 67.500 ग्राम सोना गिरवी रखकर 2.12 लाख रुपये का ऋण लिया था। इसके लिए कंपनी ने उन्हें एक ग्राहक पहचान संख्या (कस्टमर आईडी) भी जारी की थी। जिसका बाद में नवीनीकरण कराया गया था। पीड़िता के अनुसार ऋण अवधि के दौरान तत्कालीन शाखा प्रबंधक तमन्ना खातून लगातार संपर्क कर ब्याज जमा करने का दबाव बनाती थीं। वर्ष 2022 में उन्हें बताया गया कि यदि तत्काल ब्याज जमा नहीं किया गया तो गिरवी रखा गया सोना नीलाम हो सकता है। इसके बाद तारा शर्मा ने अपने पति के खाते से 90 हजार रुपये ऑनलाइन जमा कराए।

ओटीपी लेकर बंद कर दी ग्राहक आईडी

आरोप है कि भुगतान के बाद शाखा प्रबंधक ने गोल्ड लोन नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर मोबाइल पर आए ओटीपी की जानकारी मांगी। ओटीपी साझा करने के बाद उन्हें बताया गया कि उनका लोन सफलतापूर्वक रिन्यू हो गया है। बाद में कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए। पीड़िता का आरोप है कि इसी प्रक्रिया के दौरान उनकी जानकारी के बिना कस्टमर आईडी निष्क्रिय कर दी गई। जब वह अगली किस्त जमा करने शाखा पहुंचीं तो उनकी आईडी नहीं खुली। इसके बाद उन्हें पूरे मामले में गड़बड़ी का संदेह हुआ।

जांच में सामने आई अनियमितता

तारा शर्मा ने जब गिरवी रखे गए गहनों के बारे में जानकारी मांगी तो उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला। बाद में जांच-पड़ताल में पता चला कि उनका सोना कथित रूप से सतीश तिवारी के नाम पर रिलीज कर दिया गया है। इसके बाद उन्होंने कंपनी की स्पेशल विजिलेंस टीम से शिकायत की। विजिलेंस जांच रिपोर्ट में ग्राहक आईडी को दूसरे व्यक्ति के नाम स्थानांतरित किए जाने संबंधी अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट में संबंधित कर्मचारियों को क्षतिपूर्ति के लिए जिम्मेदार भी ठहराया गया। लेकिन पीड़िता को न तो गहने वापस मिले और न ही आर्थिक नुकसान की भरपाई हुई।

कार्रवाई न होने पर पीड़िता ने ली कोर्ट की शरण

स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने पर पीड़िता ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के निर्देश पर कोतवाली पुलिस ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक तमन्ना खातून, जूनियर असिस्टेंट कौशलेन्द्र उपाध्याय और सतीश तिवारी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता अजीत सिंह ने बताया कि कूटरचित दस्तावेजों और कथित छल-कपट के माध्यम से गिरवी रखे गए सोने को दूसरे व्यक्ति के नाम रिलीज किया गया। पुलिस अब मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

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