कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में हाईवोल्टेज ड्रामा: हथियारबंद ITBP जवानों ने डाला डेरा, अस्पताल पर कार्रवाई न होने से फूटा गुस्सा

कानपुर|1 घंटा पहले
हथियारबंद ITBP जवानों ने डाला डेरा, अस्पताल पर कार्रवाई न होने से फूटा गुस्सा

जिले में शनिवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के करीब 40 से 50 हथियारबंद जवान अचानक पुलिस कमिश्नरेट परिसर पहुंच गए और पूरे परिसर को घेर लिया। वर्दी और अत्याधुनिक हथियारों से लैस जवानों को एक साथ पुलिस मुख्यालय में पहुंचता देख वहां मौजूद पुलिसकर्मियों में भी हड़कंप मच गया। कुछ समय के लिए माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि स्थानीय पुलिसकर्मी पीछे हट गए और पूरे परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। करीब एक घंटे तक चले इस हाईवोल्टेज घटनाक्रम के बाद पुलिस कमिश्नर, स्वास्थ्य विभाग और ITBP अधिकारियों के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद मामला शांत हो सका।

पूरा मामला ITBP जवान विकास सिंह की मां के इलाज से जुड़ा हुआ है। विकास सिंह महाराजपुर स्थित 32वीं बटालियन में तैनात हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी मां निर्मला देवी का इलाज टाटमिल चौराहे स्थित कृष्णा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में लापरवाही से किया गया, जिसके चलते उनके हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया और बाद में डॉक्टरों को उनका हाथ काटना पड़ा। बताया गया कि 13 मई को निर्मला देवी की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें ITBP अस्पताल से रेफर किया गया था। रास्ते में जाम लगने के कारण विकास सिंह उन्हें तत्काल नजदीकी निजी अस्पताल कृष्णा हॉस्पिटल ले गए। वहां डॉक्टरों ने ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ हाथ में कैनुला लगाया, लेकिन विकास का आरोप है कि गलत इंजेक्शन या गलत इलाज के कारण उनकी मां का हाथ काला पड़ने लगा और सूजन तेजी से बढ़ गई। हालत गंभीर होने पर उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने संक्रमण फैलने की वजह से हाथ काटने का फैसला लिया।

मां का कटा हाथ लेकर पहुंचे थे पुलिस कमिश्नर ऑफिस

घटना से आहत विकास सिंह कुछ दिन पहले अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस कमिश्नर ने मामले को गंभीर मानते हुए जांच स्वास्थ्य विभाग और CMO कार्यालय को सौंप दी थी। हालांकि, शुरुआती जांच रिपोर्ट में अस्पताल की लापरवाही स्पष्ट नहीं हो सकी और कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। इसी से नाराज होकर शनिवार को बड़ी संख्या में ITBP जवान अपने अधिकारियों के साथ पुलिस कमिश्नरेट पहुंच गए। जवानों की मौजूदगी ने पूरे प्रशासनिक अमले को सतर्क कर दिया। परिसर में जगह-जगह जवान तैनात हो गए और अस्पताल के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग करने लगे। स्थिति को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। काफी देर तक चली बातचीत के बाद CMO ने मामले की दोबारा विस्तृत जांच कराने का आश्वासन दिया।

CMO ने गठित की नई जांच टीम

मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरिदत्त नेमी ने बताया कि मामले की दोबारा गहन जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित की गई है। यह टीम अस्पताल जाकर इलाज की पूरी प्रक्रिया, मेडिकल रिकॉर्ड और संबंधित डॉक्टरों की भूमिका की जांच करेगी। अधिकारियों ने ITBP प्रतिनिधियों से बातचीत कर उनकी आपत्तियों और सवालों को भी सुना। इस मामले ने शहर में निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मेडिकल लापरवाही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ITBP अधिकारियों ने दावा किया कि इसी अस्पताल में पहले भी एक महिला कांस्टेबल और एक इंस्पेक्टर की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। जवानों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसी घटनाएं आगे भी दोहराई जा सकती हैं।

सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन पर उठे सवाल

पुलिस कमिश्नरेट जैसे हाई-सिक्योरिटी परिसर में बड़ी संख्या में हथियारबंद जवानों का एक साथ पहुंचना प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को “नियंत्रित” बताया है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कानपुर के प्रशासनिक गलियारों में हलचल जरूर पैदा कर दी है। अब सभी की नजर स्वास्थ्य विभाग की नई जांच रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है।

नव्य जागरण

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