कानपुर में 3200 करोड़ का फर्जीवाड़ा: गरीबों के खातों से चला नेटवर्क, हिरासत में मास्टरमाइंड

शहर में एक चौंकाने वाला आर्थिक घोटाला सामने आया है। यहां पेंटर, कबाड़ी और मजदूर जैसे आम लोगों के बैंक खातों से करीब 3200 करोड़ रुपए के ट्रांजेक्शन किए गए। मामला सामने आते ही पुलिस हरकत में आई। सोमवार को दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वहीं इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। शुरुआती जांच में ही बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े के संकेत मिले हैं। पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
जांच में सामने आया कि इस पूरे घोटाले के पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। आरोपियों ने फर्जी कंपनियां बनाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत फायदा उठाया। इसके लिए फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए गए। साथ ही हवाला और स्लॉटर हाउस से जुड़े लेनदेन के जरिए पैसे को इधर-उधर घुमाया गया। इस तरीके से सरकार को बड़े पैमाने पर टैक्स का नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। कई और लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
गरीबों के नाम पर खोले खाते
डीसीपी ईस्ट सत्यजीत गुप्ता के मुताबिक, इस मामले की शुरुआत एक लूट की घटना से हुई। 16 फरवरी 2026 को चकेरी इलाके में लूट हुई थी। लेकिन पीड़ित महफूज आलम एफआईआर दर्ज कराने से बच रहा था। इससे पुलिस को शक हुआ। जांच में पता चला कि महफूज और उसके करीबियों के खातों में पहले 1600 करोड़ और बाद में 3200 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ। महफूज गरीब और अनजान लोगों को झांसे में लेकर उनके नाम पर फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाता था। फिर उन्हीं खातों से करोड़ों का लेनदेन करता था।
मजदूर, कबाड़ी और पेंटर बने शिकार
इस फर्जीवाड़े में जिन लोगों के नाम इस्तेमाल किए गए, वे बेहद साधारण जीवन जीने वाले हैं। जाजमऊ की रहने वाली आरती के नाम पर “आरती इंटरप्राइजेज” बनाकर करीब 100 करोड़ का ट्रांजेक्शन किया गया। इसी तरह शहनवाज के नाम पर “राजा इंटरप्राइजेज” से 64.44 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ। काशिफ और अल्फिशा के नाम पर भी करोड़ों रुपए घुमाए गए। कबाड़ी अजय शुक्ला के दस्तावेजों से 21 करोड़ और पेंटर निखिल कुमार के नाम पर 7.75 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन किया गया। इन लोगों को इसकी भनक तक नहीं थी। पुलिस जब उनके पास पहुंची तो उनकी हालत देखकर खुद अधिकारी भी हैरान रह गए।
100 से ज्यादा अकाउंट, 16 बैंकों से जुड़ा नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया कि इस घोटाले के लिए 100 से ज्यादा बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। ये खाते 16 अलग-अलग बैंकों में खुले थे। इन खातों के जरिए 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा का लेनदेन हुआ। नेटवर्क इतना बड़ा था कि कई राज्यों तक इसके तार जुड़ने की आशंका है। पुलिस अब हर खाते और हर ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। इससे जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है।
गिरफ्तारी और आगे की जांच तेज
पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड महफूज आलम उर्फ पप्पू छुरी के करीबी महताब आलम और उसके बेटे मासूम को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। वहीं महफूज से पूछताछ जारी है। उसकी गिरफ्तारी की भी तैयारी की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा किया जाएगा।
ईडी और अन्य एजेंसियां भी जांच में शामिल
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब कई बड़ी एजेंसियां भी जांच में जुट गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और रिजर्व बैंक भी इस केस की जांच कर रहे हैं। टेरर फंडिंग के एंगल से भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि यह सिर्फ टैक्स चोरी का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे और भी बड़े कनेक्शन हो सकते हैं। आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।
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