कानपुर में बड़ा साइबर फ्रॉड खुलासा : बैंक मैनेजर समेत आठ आरोपी अरेस्ट; 125 करोड़ का खेल, डिलीवरी बॉय के खाते में 67 करोड़ का ट्रांजेक्शन

शहर में पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का खुलासा किया है। नवीं मुंबई में डिजिटल अरेस्ट कर 58 करोड़ की ठगी के मामले में बैंक मैनेजर समेत कुल आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि इस गिरोह ने डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों से करोड़ों रुपए की ठगी की। मामला इतना बड़ा है कि जांच में सामने आया कि सिर्फ चार महीने में आरोपियों के खातों में करीब 125 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ। यह नेटवर्क अलग-अलग शहरों में फैला हुआ था और आम लोगों को टारगेट कर रहा था। पुलिस की कार्रवाई के बाद पूरे सिस्टम में हड़कंप मच गया है।
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि ब्लिकिंट के एक डिलीवरी बॉय सोनू शर्मा के खाते में 67 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ। इसके अलावा गिरोह के सरगना अनचित गोयल के ड्राइवर सतीश पांडेय के खाते में 53 करोड़ रुपए का ट्रांजेक्शन मिला। वहीं टैटू आर्टिस्ट साहिल विश्वकर्मा के खाते से भी करीब एक करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ। ये सभी लोग गिरोह के लिए मनी म्यूल के रूप में काम कर रहे थे। इनके खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को घुमाने और छिपाने के लिए किया जाता था।
बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू बैंक कर्मचारियों की संलिप्तता है। पुलिस के अनुसार, कई बैंक अधिकारी गिरोह के साथ मिलकर काम कर रहे थे। कन्नौज एक्सिस बैंक के ऑपरेशन हेड बहराइच निवासी धर्मेंद्र सिंह, डिप्टी मैनेजर रसूलाबाद निवासी अमित सिंह, स्वरूप नगर स्थित सीएसबी बैंक के ब्रांच मैनेजर गुजैनी निवासी अमित कुमार, साहब नगर, कल्याणपुर निवासी यूनिटी स्माल बैंक के पीआर मैनेजर आशीष कुमार और ब्रोकर बर्रा आठ निवासी तनिष गुप्ता शामिल थे। यह लोग ठगों को पुलिस कार्रवाई की जानकारी पहले ही दे देते थे। जिससे आरोपी समय रहते अपने खातों से पैसा निकाल लेते थे।
पुलिस का खुलासा
रघुबीर लाल ने बताया कि जब पुलिस साइबर ठगी से जुड़े खातों को फ्रीज करने के लिए बैंकों को नोटिस भेजती थी तो अंदर से ही सूचना लीक हो जाती थी। इसके बाद ठग तुरंत खाते खाली कर देते थे। इस तरह पुलिस की कार्रवाई बेअसर हो जाती थी। गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। अलग-अलग लोगों के नाम पर खाते खोलकर उनमें पैसा ट्रांसफर किया जाता था। इससे असली आरोपी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था।
कई बैंकों के नाम आए सामने
जांच में कई बड़े बैंकों के नाम सामने आए हैं। इनमें यूपी ग्रामीण बैंक, जम्मू–कश्मीर बैंक, सीएसबी बैंक, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक, एक्सिस बैंक, महाराष्ट्रा ग्रामीण बैंक, यूको और सिटी यूनियन बैंक शामिल हैं। पुलिस अब इन बैंकों के अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। संभावना है कि इस नेटवर्क में और लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस जल्द ही और गिरफ्तारियां कर सकती है।
डिजिटल अरेस्ट का तरीका
इस गिरोह ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए साइबर फ्रॉड तरीके का इस्तेमाल किया। इसमें लोगों को कॉल करके खुद को सरकारी अधिकारी बताया जाता था। उन्हें डराया जाता था कि उनके खिलाफ केस दर्ज है। फिर उन्हें पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था। कई लोग इस जाल में फंस गए और करोड़ों रुपए गंवा बैठे। यह तरीका तेजी से बढ़ रहा है और लोगों के लिए खतरा बनता जा रहा है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें। बैंक डिटेल्स और ओटीपी किसी के साथ साझा न करें। अगर कोई खुद को अधिकारी बताकर पैसे मांगता है, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। यह मामला एक बड़ा उदाहरण है कि कैसे छोटी सी लापरवाही से बड़ी ठगी हो सकती है।
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