गोरखपुर एम्स में मरीज की मौत के बाद हंगामा: परिजनों पर तोड़फोड़ का आरोप, एम्स प्रशासन ने दर्ज कराई एफआईआर

कुशीनगर|13 घंटे पहले
परिजनों पर तोड़फोड़ का आरोप, एम्स प्रशासन ने दर्ज कराई एफआईआर

गोरखपुर एम्स में मंगलवार तड़के एक मरीज की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर समय पर ऑक्सीजन और उचित इलाज न देने का आरोप लगाया। वहीं एम्स प्रशासन ने तीमारदारों पर अस्पताल में तोड़फोड़ और कर्मचारियों से मारपीट करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण माहौल बन गया और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। मामले में एम्स प्रशासन की तहरीर पर पुलिस ने मृतक के परिजनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक कुशीनगर निवासी 45 वर्षीय रवि यादव अल्कोहलिक पैंक्रियाटाइटिस और रीनल फेल्योर से पीड़ित थे। उनकी दोनों किडनियां खराब हो चुकी थीं और वह लंबे समय से डायलिसिस पर थे। गंभीर हालत में उन्हें एम्स के सर्जिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया था। मंगलवार सुबह करीब पांच बजे उनकी मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही परिजन और महिला तीमारदार आईसीयू पहुंच गए। उन्होंने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

अस्पताल में की तोड़फोड़

एम्स प्रशासन के अनुसार हंगामे के दौरान ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों के साथ अभद्रता की गई। आरोप है कि परिजनों ने आईसीयू के बाहर लगे शीशे के पैनल और एंट्री गेट का कांच तोड़ दिया। कुछ देर बाद मृतक का भाई भी मौके पर पहुंचा और अस्पताल कर्मचारियों से बहस करने लगा। ड्यूटी डॉक्टर द्वारा समझाने के बावजूद स्थिति शांत नहीं हुई और अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। हालात बिगड़ते देख अस्पताल प्रशासन ने ‘कोड वायलेट’ घोषित किया। सुरक्षा कर्मियों और अतिरिक्त नर्सिंग स्टाफ को मौके पर बुलाया गया। सूचना मिलते ही पुलिस भी अस्पताल पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद बॉडी को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया गया।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना के बाद एम्स प्रशासन ने संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मृतक के भाई समेत पांच अज्ञात महिला तीमारदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। वहीं परिजनों का कहना है कि मरीज को समय पर ऑक्सीजन और जरूरी इलाज नहीं मिला, जिसकी वजह से उसकी जान गई।

नव्य जागरण

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