CBSE 12वीं रिजल्ट: लखनऊ में मेधावियों का जोरदार जश्न, छात्रों को सहपाठियों ने गोद में उठाकर मनाई खुशी

Central Board of Secondary Education ने 12वीं बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया। रिजल्ट आते ही लखनऊ के स्कूलों में उत्साह का माहौल दिखा। मेधावी छात्रों का फूल-मालाओं से स्वागत हुआ। कई जगह छात्राओं ने टॉप प्रदर्शन करने वाले छात्रों को गोद में उठाकर खुशी जताई। बच्चों ने विनर साइन दिखाते हुए तस्वीरें खिंचवाईं। स्कूल कैंपस तालियों और शुभकामनाओं से गूंज उठे। शिक्षकों ने मिठाई खिलाकर छात्रों का मुंह मीठा कराया। अभिभावकों के चेहरे पर भी गर्व साफ दिखाई दिया।
रिजल्ट जारी होने के बाद स्कूलों में छात्रों की भीड़ पहुंचने लगी। कोई मोबाइल पर अंक देख रहा था। कोई दोस्तों को फोन कर खुशखबरी दे रहा था। कई छात्रों की आंखों में खुशी के आंसू दिखे। स्कूल प्रबंधन ने मेधावियों को मंच पर बुलाया। फूल देकर सम्मानित किया गया। छात्रों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बधाई दी। कई जगह सेल्फी और ग्रुप फोटो का दौर चलता रहा। लखनऊ के कई स्कूलों में अनोखा जश्न देखने को मिला। शानदार अंक लाने वाले छात्रों को सहपाठियों ने गोद में उठा लिया। छात्राओं ने विनर साइन बनाकर खुशी जाहिर की। कैंपस में “कांग्रेचुलेशन” और “वी आर प्राउड” जैसे नारों की गूंज सुनाई दी। कुछ छात्र ढोल की धुन पर झूमते भी नजर आए। माहौल पूरी तरह सेलिब्रेशन में बदल गया।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग से जांची गईं कॉपियां
इस बार 12वीं बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से 9 अप्रैल तक आयोजित हुई थीं। बोर्ड ने कॉपियों की जांच ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम से कराई। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी और तेज मानी जा रही है। छात्रों ने भी रिजल्ट समय पर जारी होने पर संतोष जताया।
वेबसाइट और एसएमएस से मिला रिजल्ट
छात्रों ने अपना रिजल्ट बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर चेक किया। इंटरनेट धीमा होने पर कई छात्रों को परेशानी भी हुई। ऐसे में बोर्ड ने एसएमएस सुविधा का विकल्प दिया। छात्र सब्जेक्ट वाइज अंक मोबाइल मैसेज के जरिए भी देख सके। हालांकि ऑनलाइन स्कोर कार्ड केवल अस्थायी माना जाएगा। छात्रों को स्कूल से ओरिजिनल मार्कशीट लेना जरूरी होगा।
मेरिट लिस्ट और टॉपर घोषित नहीं करेगा बोर्ड
CBSE इस बार भी मेरिट लिस्ट जारी नहीं करेगा। बोर्ड ने किसी छात्र को आधिकारिक टॉपर घोषित करने से भी इनकार किया है। सभी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश भेजे गए हैं। किसी छात्र को स्कूल या जिले का टॉपर बताने से बचने को कहा गया है। बोर्ड का मानना है कि इससे छात्रों पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है।
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