गोरखपुर के मानसरोवर मंदिर में उमड़ा भक्तों का सैलाब: श्रद्धालुओं ने किया शिव भगवान का जलाभिषेक, बारिश में भी गूंजा हर-हर महादेव

उत्तरप्रदेश|

सावन के तीसरे सोमवार पर शहर के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ पड़ी। शहर के मानसरोवर समेत अन्य मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई। हल्की बारिश के बीच भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। हाथों में जल और पूजा सामग्री लेकर भक्त भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुंचते रहे। मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा।

सोमवार की सुबह से शहर में हल्की-फुल्की बारिश का दौर जारी रहा। इसके बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मानसरोवर मंदिर समेत अन्य शिवालयों में पहुंचे। भक्तों ने शिवलिंग पर जल चढ़ाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की। सावन के तीसरे सोमवार को लेकर मंदिरों में विशेष उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला।

शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र मानसरोवर मंदिर

सावन शुरू होते ही शहर का ऐतिहासिक मानसरोवर मंदिर शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। करीब 300 साल पुराने इस मंदिर में भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतार लगने लगती है। हर-हर महादेव के जयकारों और मंदिर की घंटियों की गूंज से पूरा परिसर भक्तिमय नजर आता है। शहर के साथ ही दूर-दराज के जिलों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और भगवान भोलेनाथ का गंगाजल और दूध से अभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि सावन में सच्चे मन से भगवान शिव से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। सावन के अलावा महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर भी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं।

गोरक्षपीठ से जुड़ी है पुरानी परंपरा

मानसरोवर मंदिर का गोरखनाथ मंदिर और गोरक्षपीठ से भी विशेष जुड़ाव माना जाता है। समय-समय पर गोरक्षपीठाधीश्वर यहां पहुंचकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। वहीं विजयादशमी के दिन गोरक्षपीठाधीश्वर पारंपरिक शाही शोभायात्रा के साथ गोरखनाथ मंदिर से निकलकर प्राचीन मानसरोवर मंदिर पहुंचते हैं। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और मंदिर के धार्मिक महत्व को और खास बनाती है। मंदिर में वर्षभर पूजा-अर्चना होती है, लेकिन सावन के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। भक्त भगवान शिव को गंगाजल और दूध से स्नान कराते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

राजा मानसिंह से जुड़ा है मंदिर का इतिहास

मानसरोवर मंदिर का इतिहास करीब तीन शताब्दी पुराना बताया जाता है। मान्यता है कि उस समय राजा मानसिंह की पत्नी को एक दिव्य सपना आया था। सपने में भगवान शिव ने यहां मंदिर निर्माण का संकेत दिया। इसके बाद राजा मानसिंह ने इस स्थान पर भव्य शिव मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर परिसर में पवित्र सरोवर यानी कुंड का निर्माण कराया गया और भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की गई। इसी कुंड के कारण इस स्थान का नाम मानसरोवर मंदिर पड़ा। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। मंदिर की सबसे खास पहचान इसका प्राचीन कुंड और भगवान शिव का शिवलिंग है। पहले श्रद्धालुओं के बीच यह मान्यता रही कि मंदिर में पूजा और जलाभिषेक से पहले पवित्र कुंड के दर्शन किए जाते थे।

आचार्य रमेश त्रिपाठी।
आचार्य रमेश त्रिपाठी।

26 वर्षों से मानसरोवर मंदिर में कर रहे पूजा

आचार्य रमेश त्रिपाठी ने कहा कि वर्ष 2000 से मैं यहां पूजा-अर्चना कर रहा हूं। सावन में मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। भक्त भगवान शिव का गंगाजल और दूध से अभिषेक करते हैं। मेरा मानना है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान शिव से मनोकामना मांगता है, उसकी इच्छा जरूर पूरी होती है। भगवान शिव ऐसे देवता हैं, जो अपने भक्तों की मनोकामनाओं को सिद्ध और पूर्ण करने वाले माने जाते हैं। इसी आस्था के कारण सावन में दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मानसरोवर मंदिर पहुंचते हैं।

आचार्य संजय तिवारी।
आचार्य संजय तिवारी।

चारों युगों से जुड़ी है मंदिर की मान्यता

आचार्य संजय तिवारी ने कहा कि इस मंदिर की विशेषता चारों युगों से जुड़ी मानी जाती है। राजा मानसिंह ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। मंदिर परिसर में सरोवर का निर्माण होने के कारण इसका नाम मानसरोवर पड़ा। प्राचीन समय से ही यह स्थान भगवान शिव की उपासना का प्रमुख केंद्र रहा है। सावन में यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं।

श्रद्धालु जयंती शुक्ला।
श्रद्धालु जयंती शुक्ला।

25 साल से सावन का व्रत रख रही हैं : जयंती

श्रद्धालु जयंती शुक्ला ने कहा कि मैं पिछले 25 वर्षों से सावन में व्रत रख रही हूं। मेरे लिए सावन का व्रत जीवन में विशेष महत्व रखता है। इस महीने में भगवान शिव के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की पूजा का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान शिव रावण से प्रसन्न हुए तो उन्हें दशानन नाम मिला। वहीं भगवान राम से प्रसन्न होकर रामेश्वरम में पुल निर्माण में सहयोगी बनने से जुड़ी मान्यता भी भगवान शिव की महिमा को दशार्ती है।

सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम

मानसरोवर मंदिर में उमड़ी भीड़ के मद्देनजर परिसर में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए भारी पुलिस बल तैनात है। यहां तैनात पुलिसकर्मी मंदिर आने-जाने वाले श्रद्धालुओं पर नजर रख रहे हैं। सुरक्षा के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा का भी ध्यान रखा जा रहा है, ताकि दर्शन और जलाभिषेक के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो।

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