बलरामपुर में मनाया गया इंजीनियरिंग डे: तकनीक के साथ सामाजिक सोच जरूरी, 180 विद्यार्थियों ने निबंध में लिया हिस्सा

बलरामपुर में मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय में भारत रत्न डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जयंती पर भारतीय इंजीनियरिंग दिवस मनाया गया। स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की ओर से आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत परिसर में पौधरोपण से हुई। विद्यार्थियों ने पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। मुख्य अतिथि अधिशासी अभियंता अर्पित निगम रहे। अध्यक्षता कुलपति प्रो. रवि शंकर सिंह ने की।
कुलपति ने कहा कि इंजीनियरिंग अब केवल तकनीक और मशीनों तक सीमित नहीं है। इसका विस्तार सोशल इंजीनियरिंग के रूप में भी हो रहा है। इंजीनियरों को तकनीकी दक्षता के साथ समाज की जरूरतों और समस्याओं को समझना होगा। 21वीं शताब्दी टेक्नोलॉजी की है, इसलिए नॉलेज और विजडम के संतुलन के साथ इसका इस्तेमाल मानव विकास के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर इंजीनियरिंग माइंडसेट की इंजीनियरिंग का भी है। तकनीकी दक्षता के साथ सामाजिक सरोकारों को कार्य का हिस्सा बनाना जरूरी है।
मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच जरूरी
कुलपति ने विद्यार्थियों से अलग-अलग विषयों का ज्ञान हासिल करने का आह्वान किया। मल्टीडिसिप्लिनरी अप्रोच जटिल समस्याओं के समाधान में मदद करेगी।
विजेताओं को किया गया सम्मानित
निबंध प्रतियोगिता में 180 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। कादरिया बानो प्रथम, सुनील पाल द्वितीय और प्रियांशी तृतीय रहीं। विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। बीसीए विद्यार्थी रूपेश को विशेष सम्मान मिला। कार्यक्रम में कला संकाय निदेशक प्रो. बीपी सिंह, कुलसचिव परमानंद सिंह, प्राध्यापक और विद्यार्थी मौजूद रहे।











